
दिल्ली में 11 साल की लड़की से रेप, पीटा और जान से मारने की धमकी दी
संक्षेप: दिल्ली के पांडव नगर इलाके से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पुलिस ने एक शख्स को 11 साल की नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी पीड़िता के पड़ोस में रहता है।
दिल्ली के पांडव नगर इलाके में एक 11 साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात सामने आई है। आरोपी पीड़िता के पड़ोस में रहता है। परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने नाबालिग की काउंसलिंग कराई और उसके बयान पर केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़िता अपने परिवार के साथ पटपड़गंज गांव में रहती है। उसके परिवार में माता-पिता व अन्य सदस्य हैं।

मंगलवार को नाबालिग अपने घर के पास खेल रही थी। इस बीच आरोपी वहां पहुंचा। उसने नाबालिग को बातों में लगा दिया। बाद में किसी बहाने से वह उसे लेकर अपने कमरे पर आ गया। आरोपी ने वहां जबरन वारदात को अंजाम दिया। विरोध करने पर आरोपी ने उसकी पिटाई भी कर दी। वारदात के बाद उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता बदहवास अपने घर पहुंची तो मां ने उससे पूछताछ की।
बाद में नाबालिग ने डरते-डरते मां को सारी बात बता दी। इसके बाद पुलिस को खबर दी गई। पुलिस ने परिजनों की सहमति पर नाबालिग का मेडिकल करवाया। इसके बाद उसका बयान लेकर पॉक्सो और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया। बाद में पुलिस ने आरोपी को एरिया से दबोच लिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है। वारदात के बाद से नाबालिग बुरी तरह सहमी हुई है।
इससे इतर दिल्ली उच्च न्यायालय ने पॉक्सो के एक मामले में एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि बिना किसी सबूत के केवल शारीरिक संबंध शब्द का प्रयोग, दुष्कर्म या गंभीर यौन उत्पीड़न की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। यहां पीड़िता के माता-पिता ने बार-बार कहा कि शारीरिक संबंध स्थापित हुए, लेकिन इस बयान को लेकर ना कोई फोरेंसिक सबूत हैं और न ही पीड़िता की गवाही है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो अधिनिमय की धारा छह के तहत अपीलकर्ता की दोषसिद्धि टिकने योग्य नहीं है। दोषी व्यक्ति ने 10 साल की सजा को चुनौती दी थी। यह मामला 2023 में दर्ज किया गया था। पीड़िता ने कहा था कि 2014 में आरोपी (जो उसका चचेरा भाई है) ने शादी का झांसा देकर उसके साथ एक साल से ज्यादा समय तक यौन संबंध बनाए। याचिका स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला केवल मौखिक साक्ष्य पर आधारित है, जो पीड़िता व उसके माता-पिता की गवाही है। रिकॉर्ड में कोई फोरेंसिक साक्ष्य नहीं है।





