न्यायिक हिरासत में भेजे गए IYC के 3 कार्यकर्ता, समानता के आधार पर मांगी थी जमानत; कोर्ट का इनकार
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को एआई शिखर सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन करने के मामले में भारतीय युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं, दिव्यांश गिरधर, भूदेव शर्मा और कुबेर मीना को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 6 मार्च को तय की।

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को एआई शिखर सम्मेलन में विरोध प्रदर्शन करने के मामले में भारतीय युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं, दिव्यांश गिरधर, भूदेव शर्मा और कुबेर मीना को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत ने उनकी जमानत याचिकाओं पर नोटिस भी जारी किया और मामले की सुनवाई 6 मार्च को तय की। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने शर्मा, गिरधर और मीना को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
इससे पहले, अदालत ने भूदेव शर्मा और दिव्यांश गिरधर की पुलिस हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी थी। पुलिस हिरासत जारी करते हुए अदालत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और सबूतों की बरामदगी के साथ-साथ सह-आरोपियों की गिरफ्तारी का विशेष महत्व है। इस बीच, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में नौ आरोपियों को दी गई जमानत को चुनौती दी है। अदालत ने उन्हें नोटिस जारी किया है।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट चरण सलवान ने इससे पहले भूदेव शर्मा और दिव्यांश गिरधर की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं और उन्हें दो दिन की अतिरिक्त पुलिस हिरासत में भेज दिया था। दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों के लिए तीन अतिरिक्त दिनों की हिरासत की मांग की थी।
समानता के आधार पर जमानत मांगी थी
दूसरी ओर, आरोपियों ने 10 अन्य आरोपियों के साथ समानता के आधार पर जमानत मांगी थी। हालांकि, अदालत ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मेरे विचार से रिमांड के लिए वर्तमान आवेदन और जमानत की अर्जी उन सह-आरोपियों से बिल्कुल अलग हैं जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र का यह एक स्थापित सिद्धांत है कि जमानत के मामलों में समानता का नियम एक प्रासंगिक विचारणीय बिंदु है, लेकिन इसे एकसमान तरीके से लागू नहीं किया जा सकता है।
ऐसे अधिकारों का प्रयोग निरपेक्ष नहीं
कोर्ट ने विरोध के अधिकार पर भी विचार किया। यह मानते हुए कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) और अनुच्छेद 19(3) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन विरोध का अधिकार एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक गारंटी है। हालांकि, ऐसे अधिकारों का प्रयोग निरपेक्ष नहीं है। इसे सार्वजनिक व्यवस्था, राज्य की सुरक्षा और संविधान के तहत परिकल्पित अन्य वैध प्रतिबंधों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन की प्रकृति, समय और स्थान प्रासंगिक
कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि कथित विरोध प्रदर्शन एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इसमें विदेशी प्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट सलवान ने कहा कि जांच के इस चरण में विरोध प्रदर्शन की प्रकृति, समय और स्थान प्रासंगिक कारक हैं।
दिव्यांश गिरधर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि उनकी पिछली जमानत याचिका को ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने 27 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा पहले ही खारिज कर दिया था। हालांकि, आरोपी के वकील ने जानबूझकर जमानत याचिका में इस तथ्य का खुलासा नहीं किया, इसलिए याचिका खारिज किए जाने योग्य है।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद कर सकते हैं
अतिरिक्त लोक अभियोजक अतुल श्रीवास्तव ने पुलिस रिमांड की मांग करते हुए बताया कि दोनों आरोपी मनीष शर्मा और विश्वजीत फरार हैं। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान में हिरासत में लिए गए आरोपी फरार आरोपियों की पहचान करने और उनकी गिरफ्तारी में मदद कर सकते हैं।
आरोप है कि भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने 20 फरवरी 2026 को हुए विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस ने आगे आरोप लगाया कि विश्वजीत ने भारत मंडपम के पास नारे लिखे टी-शर्ट बांटे थे।
हिरासत की जरूरत नहीं
दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर और रूपेश सिंह भदौरिया आरोपियों की ओर से पेश हुए। उन्होंने बताया कि नौ अन्य आरोपियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने 1 मार्च को पहले ही जमानत दे दी थी। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि जांच के उद्देश्य से आरोपियों की आगे की हिरासत की जरूरत नहीं है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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