
गोवा नाइटक्लब वाले लूथरा भाइयों को झटका, दिल्ली की अदालत ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
दोनों आरोपियों ने एक दिन पहले अदालत से चार हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांगी थी, ताकि थाईलैंड से दिल्ली लौटने के बाद उन्हें तुरंत गिरफ्तार न किया जाए। हालांकि अदालत ने उन्हें झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
दिल्ली की एक अदालत ने गोवा के 'बिर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब के मालिकों सौरभ और गौरव लूथरा को गुरुवार को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इस नाइट क्लब में पिछले हफ्ते लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी। दोनों आरोपियों ने एक दिन पहले बुधवार को अदालत से चार हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांगी थी, ताकि थाईलैंड से दिल्ली लौटने के बाद उन्हें तुरंत गिरफ्तार न किया जाए। हालांकि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वंदना ने लूथरा भाइयों को झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।

दिल्ली के रहने वाले नाइटक्लब के दोनों मालिक गिरफ्तारी से बचने के लिए हादसे वाली रात को ही थाइलैंड के फुकेट शहर भाग गए थे। नाइटक्लब में आग लगने की यह घटना 6 दिसंबर की रात को हुई थी।
‘कानून उन लोगों की मदद नहीं करता’
सुनवाई के दौरान गोवा राज्य के वकील ने लूथरा भाइयों की याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा, ‘वे चले गए थे, उन्होंने खुद को छिपाया, और अब वे नरमी की मांग कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि लूथरा भाइयों ने आग लगने की घटना के तुरंत बाद गोवा छोड़ दिया था और वे कानूनी प्रक्रिया से बच रहे थे। राज्य के वकील ने कहा कि कानून उन लोगों की मदद नहीं करता जो समन या वारंट का पालन करने से इनकार करते हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के एक वकील ने तर्क दिया कि वे तुरंत लौटने और जांच का सामना करने को तैयार हैं, ऐसे में उन्हें शुरुआत में ही सजा न दी जाए। उन्होंने कहा कि भाइयों ने जल्द से जल्द दिल्ली कोर्ट का रुख किया और बिना किसी देरी के जांच में शामिल होने का वादा किया। वकील ने कहा कि ट्रांजिट बेल मेरिट के आधार पर फैसला नहीं है, बल्कि सही कोर्ट तक सुरक्षित पहुंचने के लिए एक सीमित सुरक्षा है।
वकील ने कहा- कोर्ट के मुट्ठी नहीं मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए
अपने तर्क के समर्थन में वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया जिसमें विदेश में बैठे एक आरोपी को, जिसके खिलाफ ब्लू और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने पर विचार किया जा रहा था, अस्थायी सुरक्षा के साथ भारत लौटने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा, 'दोनों भाई कोर्ट तक सुरक्षित पहुंचने के लिए सिर्फ कुछ दिनों की सुरक्षा चाहते हैं। ऐसे में जब कोई नागरिक कानून के सामने आत्मसमर्पण करने को तैयार होता है, तो कोर्ट को मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए, मुट्ठी नहीं।'
गोवा सरकार के वकील ने किया अग्रिम जमानत का विरोध
लूथरा भाइयों की याचिका का विरोध करते हुए गोवा राज्य के वकील ने तर्क दिया कि लूथरा भाइयों ने आग लगने के तुरंत बाद गोवा छोड़ दिया था और वे कानूनी प्रक्रिया से बच रहे थे। उन्होंने कहा कि कानून उन लोगों की मदद नहीं करता जो समन या वारंट का पालन करने से इनकार करते हैं।
न्यायिक टिप्पणियों का जिक्र करते हुए, वकील ने कहा, 'एक बार जब यह साबित हो जाता है कि कोई व्यक्ति कानून की प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रहा है, तो कोर्ट को उसकी मदद बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि अग्रिम जमानत एक विवेकाधीन राहत है और उन लोगों को नहीं दी जा सकती जिन्होंने वारंट के निष्पादन में बाधाएं पैदा की हैं या खुद को छिपाया है।
उधर कर्मचारी जिंदा जल रहे थे, इधर दोनों भाई फुकेट भाग गए
अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों भाइयों ने छह-सात दिसंबर की दरम्यानी रात एक बजकर 17 मिनट पर एक यात्रा पोर्टल के माध्यम से फुकेट के लिए अपनी टिकटें बुक की थीं। उन्होंने उत्तरी गोवा के अरपोरा में स्थित उनके नाइट क्लब ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ में लगी भीषण आग के बारे में पता चलने के एक घंटे के भीतर टिकटें बुक कर ली थीं। जिस समय पुलिस और प्रशासन आग बुझाने तथा कर्मचारियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, उसी दौरान ये दोनों रविवार तड़के इंडिगो की एक उड़ान से थाइलैंड भाग गए थे।
उधर नाइटक्लब के दोनों मालिकों 44 वर्षीय गौरव और 40 वर्षीय सौरभ को भारत सरकार के अनुरोध पर गुरुवार को थाइलैंड में हिरासत में लिया गया। दोनों के खिलाफ इंटरपोल का ‘ब्लू कॉर्नर नोटिस’ जारी किया गया था। जिसके बाद गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि सीबीआई और गोवा पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि नाइट क्लब में आग लगने के आरोपी लूथरा बंधुओं को जल्द से जल्द भारत लाया जाए।



