आरोपी का पिछला आचरण भरोसे लायक नहीं; पत्नी को तेजाब पिलाने के आरोपी को जमानत देने से कोर्ट का इनकार
साल 2020 में कोरोनाकाल के दौरान मानवीय आधार पर आरोपी पति जितेंद्र को 45 दिनों की अंतरिम जमानत दी गई थी। लेकिन उसने कानून का सम्मान करने के बजाय उसका फायदा उठाया और फरार हो गया था।

दिल्ली की रोहिणी जिला अदालत ने साल 2018 में अपनी पत्नी को जबरन तेजाब पिलाने के आरोपी पति को राहत देने से इनकार कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार की अदालत ने आरोपी जितेंद्र उर्फ जॉनी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर है और आरोपी का पिछला आचरण भरोसे लायक नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के बाहर आने से न केवल गवाहों को खतरा हो सकता है, बल्कि उसके दोबारा कानून की गिरफ्त से भागने की पूरी आशंका है।
पति और ससुराल वालों पर लगाया आरोप
यह मामला साल 2018 में शाहबाद डेयरी थानाक्षेत्र में सामने आया था। पीड़ित महिला ने अपने पति जितेंद्र और ससुराल वालों पर उसे बंधक बनाकर जबरन तेजाब जैसा पदार्थ पिलाने का आरोप लगाया था। जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 323, 328, 326-ए, 342 और 34 के तहत FIR दर्ज की थी। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी 28 जून 2018 से न्यायिक हिरासत में है। पीड़िता ने पूरे परिवार को झूठा फंसाया है और फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी कपड़ों पर तेजाब की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही यह भी दावा किया कि घटना के समय आरोपी नाई की दुकान पर था और पत्नी ने खुद पुलिस को फोन कर किसी अज्ञात लड़के द्वारा तेजाब जैसा पदार्थ पिलाने की बात कही थी।
अंतरिम जमानत पर फरार हो गया था आरोपी
पीड़िता के अधिवक्ता रवि दराल ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों को गंभीर बताया। उन्होंने आरोपी के पुराने रिकॉर्ड से भी अदालत को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल के दौरान साल 2020 में मानवीय आधार पर जितेंद्र को 45 दिनों की अंतरिम जमानत दी गई थी। लेकिन उसने कानून का सम्मान करने के बजाय उसका फायदा उठाया और फरार हो गया। पुलिस ने मई 2023 में उसे दोबारा गिरफ्तार किया। अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति पहले ही जमानत का दुरुपयोग कर चुका हो, उसे दोबारा राहत देकर ट्रायल में देरी का जोखिम नहीं लिया जा सकता।
लेखक के बारे में
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