
घूस दो नहीं तो घर गिरा दूंगा...; रिश्वतखोरी मामले में MCD के जेई समेत 3 लोग दोषी करार
दिल्ली की एक अदालत ने रिश्वतखोरी के मामले में एमसीडी के एक जूनियर इंजीनियर सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है। आरोप है कि इन लोगों ने घर बनाने की अनुमति देने के लिए रिश्वत की मांग की थी। साथ ही रिश्वत नहीं देने पर घर गिराने की धमकी दी थी।
दिल्ली की एक अदालत ने रिश्वतखोरी के मामले में एमसीडी के एक जूनियर इंजीनियर सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है। आरोप है कि इन लोगों ने घर बनाने की अनुमति देने के लिए रिश्वत की मांग की थी। साथ ही रिश्वत नहीं देने पर घर गिराने की धमकी दी थी। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 5 जनवरी की तारीख तय की है।
दिल्ली की एक अदालत ने सीबीआई द्वारा 2024 में दर्ज रिश्वतखोरी के मामले में एमसीडी के एक जूनियर इंजीनियर सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है। विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने सुरेंद्र कुमार शर्मा, सुरेंद्र कुमार जांगरा और रमेश चंद जैन को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध) और भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराधों का दोषी पाया।
रमेश चंद जैन दिल्ली नगर निगम में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे, जबकि जांगरा पूर्व सहायक थे। शर्मा ने जैन के साथ मिलीभगत करके एमसीडी अधिकारी होने का नाटक किया।अभियोजन पक्ष के अनुसार, 18 मार्च 2024 को जेई शर्मा ने शिकायतकर्ता अरुण कुमार गुप्ता से घर बनाने की अनुमति देने के बदले रिश्वत की मांग की। उन्होंने शिकायतकर्ता के घर को गिराने की धमकी भी दी। गुप्ता ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया और शिकायत दर्ज कराई।
24 दिसंबर को दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि पर्याप्त सबूत हैं जिनसे पता चलता है कि शर्मा और जांगरा ने रिश्वत की रकम की मांग की थी और शर्मा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे। रिश्वत की रकम उनके पास से बरामद की गई थी।
अदालत ने आगे कहा कि सबूतों से यह साबित होता है कि आरोपियों ने जैन के साथ मिलीभगत और साजिश की थी। जैन एमसीडी में जूनियर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे थे। तीनों के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। अदालत ने कहा कि रिश्वत की रकम की बरामदगी, रासायनिक परीक्षण और स्वतंत्र गवाहों द्वारा पुष्टि से अभियोजन पक्ष का मामला साबित होता है।
बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान सही और स्पष्ट थे। साथ ही वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों द्वारा भी इसकी पुष्टि हुई। जज ने कहा कि अदालत पाती है कि रिश्वत की मांग और लेने के पर्याप्त सबूत हैं। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 5 जनवरी की तारीख तय की है।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




