पूर्व केंद्रीय मंत्री के भाई समेत 5 आरोपी बरी, कोयला घोटाला मामले में अदालत ने दिया CBI को झटका
CBI ने आरोप लगाया था कि कंपनी और उससे जुड़े अन्य आरोपियों ने जानबूझकर तथ्यों को छिपाते हुए धोखा दिया था। इसमें कोल ब्लॉक का आवंटन हासिल करने के लिए अपनी तैयारी को उच्च स्तर का दिखाने के लिए झूठे दावे और आंकड़े पेश करना भी शामिल था।

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला छत्तीसगढ़ के 'विजय सेंट्रल कोल ब्लॉक' के आवंटन में हुई कथित अनियमितता को लेकर सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने इस मामले में आरोपी बनाई गई SKS इस्पात एंड पावर लिमिटेड समेत अन्य सभी चार आरोपियों को बरी कर दिया। राहत पाने वाले अन्य लोगों में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल गुप्ता, जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक गुप्ता, मैनेजर अमृत सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के भाई व नामित डायरेक्टर सुधीर कुमार सहाय शामिल हैं।
विशेष न्यायाधीश सुनेना शर्मा ने मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही है। अदालत ने जांच एजेंसी की तरफ से पेश किए सबूतों को आरोपों को साबित करने के लिए अपर्याप्त बताया। साथ ही कहा कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
CBI बोली- आरोपियों ने झूठे दावे किए
इससे पहले CBI ने कंपनी और अन्य आरोपी व्यक्तियों पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने जानबूझकर तथ्यों को छिपाया और धोखा दिया। इसमें कोल ब्लॉक का आवंटन हासिल करने के लिए अपनी तैयारी को उच्च स्तर का दिखाने के लिए झूठे दावे और आंकड़े पेश करना भी शामिल था।
लगाया था साजिश रचने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप था कि SKS इस्पात एंड पावर लिमिटेड के पक्ष में कैप्टिव कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल करने के लिए आरोपियों ने एक साजिश रची थी और अपनी नेटवर्थ, जमीन, निवेश और मंजूरियों के बारे में केंद्रीय कोयला मंत्रालय के पास कई झूठे दावे किए थे।
कोर्ट ने CBI के सबूतों को बताया अपर्याप्त
इस केस को लेकर 23 मई को सुनाए अपने 271 पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा सीबीआई की तरफ से रिकॉर्ड पर पेश किए गए सभी सबूतों को अपर्याप्त बताया और कहा कि ये सबूत धोखाधड़ी के अपराध में सजा सुनाने के लिए जरूरी तत्वों जैसे कि धोखा, प्रलोभन, बेईमान इरादा या गलत लाभ में से किसी को भी साबित नहीं कर पा रहे हैं।
सीबीआई नहीं पेश कर सकी कोई सबूत
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि नेटवर्थ, निवेश, जमीन, एंड यूज प्लांट (EUP) क्षमता और मंजूरी के बारे में कथित झूठे दावों से जुड़ा अभियोजन पक्ष का मामला साबित नहीं हो पाया। अदालत ने कहा, 'IPC की धारा 120B के तहत आपराधिक साजिश के आरोप को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष (सीबीआई) एक भी ऐसा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सबूत पेश नहीं कर पाया जो यह साबित कर सके कि कथित अपराध को अंजाम देने के लिए आरोपियों के बीच किसी भी तरह की पूर्व सहमति थी।'
सुबोध कांत सहाय के पत्र पर कोर्ट की टिप्पणी
सीबीआई ने मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के एक सिफारिशी पत्र का भी जिक्र किया था। हालांकि, अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि पूर्व मंत्री या उनके भाई द्वारा लिखा गया कोई पत्र कोयला मंत्रालय की 36वीं स्क्रीनिंग कमेटी के सामने कभी रखा गया था या उसने कमेटी के फैसले को प्रभावित किया था।
कोयला घोटाले मामलों की वर्तमान स्थिति
CBI ने इस कथित कोयला घोटाले के संबंध में 50 से ज्यादा मामले दर्ज किए थे। जिनमें से 25 से ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले वर्तमान में कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित दो विशेष अदालतों में लंबित हैं, जबकि अब तक 27 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
जनवरी, 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि PMLA के तहत 45 शिकायतें, जिनमें सप्लीमेंट्री शिकायतें भी शामिल हैं, लंबित हैं। बता दें कि सर्वोच्च अदालत ने साल 2014 में दो PILs पर संज्ञान लेते हुए, केंद्र द्वारा 1993 और 2010 के बीच आवंटित 214 कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया था और एक विशेष CBI जज द्वारा ट्रायल का आदेश दिया था।
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