दिल्ली में कंपनियां नहीं करा सकेंगी ई-रिक्शा का थोक रजिस्ट्रेशन, सर्कुलर वापस

Krishna Bihari Singh भाषा, नई दिल्ली
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दिल्ली सरकार ने कंपनियों द्वारा ई-रिक्शा के सामूहिक पंजीकरण पर रोक लगा दी है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट एकाधिकार को खत्म करना और व्यक्तिगत चालकों को स्वरोजगार हेतु सशक्त बनाना है।

दिल्ली में कंपनियां नहीं करा सकेंगी ई-रिक्शा का थोक रजिस्ट्रेशन, सर्कुलर वापस

दिल्ली परिवहन विभाग ने कंपनियों को एक साथ कई ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति देने वाला अपना पुराना सर्कुलर वापस ले लिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले का मुख्य उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में बड़े कॉर्पोरेट एकाधिकार को रोकना और व्यक्तिगत चालकों के हितों की रक्षा करना है। परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह के अनुसार, अब ई-रिक्शा का मालिकाना हक कुछ कंपनियों के बजाय आम लोगों और गरीब चालकों के पास रहेगा। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' प्रदान करने वाले हजारों चालकों को आर्थिक शोषण से बचाएगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर सम्मानजनक आजीविका कमाने का मौका देगा।

2022 वाला सर्कुलर वापस

जारी आधिकारिक नोट में बताया गया है कि दिल्ली परिवहन विभाग ने चालक के साथ उनके वाहन के हितों की रक्षा के लिए अपना 21 अप्रैल, 2022 वाला वह सर्कुलर वापस ले लिया है। इसके तहत कंपनियों और फर्मों को अपने नाम पर कई ई-कार्ट और ई-रिक्शा (केवल लिथियम-आयन बैटरी मॉडल तक सीमित) रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति थी।

…ताकि दिल्ली के ज्यादा लोगों को मिले लाभ

यह संशोधित निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन के फायदे राजधानी दिल्ली के ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच अधिक व्यापक रूप से पहुंचे। कुछ ही कंपनियों या फर्मों के हाथों में मालिकाना हक जमा होने को रोककर, सरकार का मकसद स्वरोजगार को बढ़ावा देना, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के शोषण को कम करना है।

ड्राइवरों के लिए आत्मनिर्भर रोजगार की पहल

जारी बयान में कहा गया है कि दिल्ली सरकार उन चालकों की आजीविका के आधार को मजबूत करना चाहती है जो शहर की 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' (आखिरी छोर तक पहुंचने की सुविधा) की रीढ़ हैं। इस निर्णय के प्रमुख लाभों में मालिक ड्राइवरों के लिए ज्यादा बेहतर आर्थिक अवसर, ई-रिक्शा सेक्टर पर किसी एक का कब्जा होने का जोखिम कम करना और आत्मनिर्भर रोजगार मॉडल के लिए बेहतर समर्थन शामिल हैं।

सम्मानपूर्वक आजीविका कमाने में मदद की उम्मीद

इस कदम से हजारों व्यक्तिगत चालकों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने और बिना किसी बड़े-बड़े संचालकों और मालिकों के सिर्फ कर्मचारी बनकर न रहते हुए सम्मानपूर्वक आजीविका कमाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

समान आजीविका के अवसर देने की कवायद

इस पहल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि हमारा यह निर्णय समान आजीविका के अवसरों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करता है। वाहन को व्यक्तिगत चालक के हाथों में वापस देकर हम स्वरोजगार को बेहद सशक्त बना रहे हैं। हम दिल्ली की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की रीढ़ की रक्षा कर रहे हैं।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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