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कार धमाके को पुलिस ने बताया बम विस्फोट; अटैकर ने कैसे जुटाया इतना अमोनियम नाइट्रेट?

कार धमाके को पुलिस ने बताया बम विस्फोट; अटैकर ने कैसे जुटाया इतना अमोनियम नाइट्रेट?

संक्षेप: दिल्ली पुलिस ने लाल किला के पास हुए कार धमाके को 'बम विस्फोट' करार दिया है। अब जांच एजेंसियां ​​इस बात पर फोकस कर रही हैं कि कैसे इस आतंकी मॉड्यूल ने इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक हासिल किया?

Tue, 11 Nov 2025 08:44 PMKrishna Bihari Singh वार्ता, नई दिल्ली
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दिल्ली पुलिस ने लाल किला के पास हुए कार धमाके को अपनी प्राथमिकी में 'बम विस्फोट' करार दिया है। प्राथमिकी में कहा गया है कि विस्फोट के कारण वहां दिल्ली पुलिस की चौकी की दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई। यह एक बम विस्फोट प्रतीत होता है। जांच एजेंसियां ​​इस बात पर फोकस कर रही हैं कि कैसे इस आतंकी मॉड्यूल ने इतनी भारी मात्रा में विस्फोटक हासिल किया, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट भी शामिल है।

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खरीद नेटवर्क की पड़ताल

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, माना जा रहा है कि लाल किला इलाके में हुए धमाके में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था। इस हमले ने एक बार फिर बता दिया है कि कैसे अमोनियम नाइट्रेट को आसानी से हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। अब जांच टीमें अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल के रसद और खरीद नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

अमोनियम नाइट्रेट, तेल और डेटोनेटर का इस्तेमाल

पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिलता है कि लाल किले के पास हुए बम धमाके में संभवत: अमोनियम नाइट्रेट, तेल और डेटोनेटर का इस्तेमाल किया गया है। गौर करने वाली बात यह भी कि लाल किला के पास हुआ कार बम धमाका फरीदाबाद में 2,900 किलो विस्फोटक जब्त करने के कुछ घंटों बाद हुआ। एजेंसियों ने धमाके से पहले जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया था।

अमोनियम नाइट्रेट डबल यूज केमिकल

सूत्रों की मानें तो इस आतंकी मॉड्यूल का नेटवर्क कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है। दरअसल, अमोनियम नाइट्रेट एक डबल यूज केमिकल है। इसका एक तरफ व्यापक रूप से इस्तेमाल नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में किया जाता है तो दूसरी ओर पत्थर की खदानों में नियंत्रित विस्फोट के लिए भी इसे काम में लाया जाता है। आतंकी इसे पोटेशियम क्लोरेट और सल्फर समेत अन्य केमिकल के साथ बम बनाने में करते हैं।

पुलवामा हमले में हुआ इस्तेमाल

आतंकी आईईडी के साथ इसका इस्तेमाल करते हैं। आतंकवादी समूह अमोनियम नाइट्रेट को तेल के साथ मिलाकर अमोनियम नाइट्रेट ईंधन तेल विस्फोटक (एएनएफओ) बनाते हैं। फिर यह तेजी से ज्वलनशील हो जाता है। सनद रहे 2019 के पुलवामा हमले में आरडीएक्स के साथ अमोनियम नाइट्रेट का भी इस्तेमाल किया गया था। पुलवामा आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत हो गई थी।

आतंकी हमलों में इस्तेमाल देख कड़े किए थे नियम

सरकार ने 2011 में 45 फीसदी से अधिक अमोनियम नाइट्रेट वाले उर्वरकों को विस्फोटक घोषित कर दिया था। यही नहीं साल 2015 में सरकार ने अमोनियम नाइट्रेट के आयात और परिवहन के मानदंडों को और कड़ा करते हुए आदेश दिया था कि इसकी खेप केवल सील पैक बंद पैकेट के रूप में ही भेजी जा सकेगी। यही नहीं देश के भीतर इसकी आवाजाही जीपीएस वाहनों वाले सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों के साथ की जाएगी।

कहां से आया इतना अमोनियम नाइट्रेट?

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट कहां से लाया गया। क्या इसे दिल्ली से खरीदा गया था? या आरोपी डॉक्टर उमर ने इसे खुद तैयार किया था। सूत्रों की मानें तो डॉक्टर उमर का संबंध फरिदाबाद स्थित आतंकवादी मॉड्यूल से था। माना जा रहा है कि सोमवार शाम हुए बम धमाके में डॉ. उमर नबी की मौत हो गई है। ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि डॉक्टर उमर कार में था।

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DNA से होगी पहचान, टेरर नेटवर्क भी जांच

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उमर की मां का डीएनए नमूना लिया ताकि मौके से बरामद अवशेषों से मिलान कराया जा सके। यदि अवशेषों की जांच रिपोर्ट उमर की मां का डीएनए से मैच कर जाती है तो आधिकारिक तौर पर साबित हो जाएगा कि हमले को डॉ. उमर नबी ने अंजाम दिया जो फरीदाबाद टेरर नेटवर्क का हिस्सा था। सूत्रों की मानें तो एजेंसियां दिल्ली बम हमले की जांच टेरर एंगल से कर रही हैं। यूपी, फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर में कई संदिग्धों को उठाया गया है।

(पीटीआई की रिपोर्ट के साथ)

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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