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इस्लाम में सुसाइड है हराम; शख्स ने फिदायीन बनने से किया था इनकार,  डॉ. उमर पर बड़ा खुलासा

इस्लाम में सुसाइड है हराम; शख्स ने फिदायीन बनने से किया था इनकार, डॉ. उमर पर बड़ा खुलासा

संक्षेप: दिल्ली ब्लास्ट के बाद व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच में नित नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल पिछले साल से ही एक आत्मघाती हमलावर की तलाश कर रहा था।

Sun, 16 Nov 2025 05:30 PMKrishna Bihari Singh पीटीआई, नई दिल्ली/श्रीनगर
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच में नित नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का मुख्य योजनाकार डॉ. उमर नबी पिछले साल से ही एक आत्मघाती हमलावर की तलाश कर रहा था। गिरफ्तार एक सह-आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उमर ने उसे फिदायीन बनाने की कोशिश की थी लेकिन उसने इस्लाम में सुसाइड हराम है का हवाला दे आत्मघाती बनने से इनकार कर दिया था।

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आत्मघाती हमलावर की थी तलाश

गिरफ्तार सह-आरोपी से पूछताछ में संकेत मिला कि डॉ. उमर कट्टर कट्टरपंथी था। उसके अभियानों के लिए एक आत्मघाती हमलावर चाहिए था। बता दें कि डॉ. उमर नबी 10 नवंबर को लाल किले के पास विस्फोटकों से लदी कार चलाते समय मारा गया था।

कुलगाम की एक मस्जिद पहुंचा था 'डॉक्टर मॉड्यूल'

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनगर पुलिस ने दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड में एक टीम भेजी और डॉ. अदील राथर और डॉ. मुजफ्फर गनई समेत सह-आरोपियों से पूछताछ की। इस पूछताछ के आधार पर राजनीति विज्ञान में स्नातक जसीर उर्फ ​​'दानिश' को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए संदिग्ध ने पिछले साल अक्टूबर में कुलगाम की एक मस्जिद में 'डॉक्टर मॉड्यूल' से मिलने की बात मानी। फिर उसे फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी में किराए के मकान में ले जाया गया।

इस्लाम में आत्महत्या हराम, हवाला दे छुड़ाया पीछा

हिरासत में लिए गए शख्स ने बताया कि मॉड्यूल के अन्य लोग उसे जैश-ए-मोहम्मद के लिए एक ओवरग्राउंड वर्कर बनाना चाहते थे। डॉ. उमर ने कई महीनों तक उसका ब्रेन वॉश किया कि वह आत्मघाती हमलावर बन जाए। हालांकि इस साल अप्रैल में 'डॉक्टर मॉड्यूल' की योजना तब ध्वस्त हो गई जब शख्स ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति और इस्लाम में आत्महत्या को हराम मानने का हवाला देते हुए आत्मघाती बनने से इनकार कर दिया था।

6 दिसंबर को बड़े विस्फोट की योजना

आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर की यह साजिश जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क के घातक और खतरनाक मंसूबों का खुलासा करती है। इस तरह पुलवामा का 28 वर्षीय डॉक्टर उमर कश्मीर, हरियाणा और यूपी में फैले व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का सबसे प्रमुख सदस्य बनकर उभरा है। अधिकारियों का मानना ​​है कि डॉ. उमर 6 दिसंबर को बाबरी ढांचा विध्वंस की बरसी के आसपास भीषण धमाके की योजना बना रहा था।

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धार्मिक स्थान पर थी धमाके की योजना

अधिकारियों ने सबूतों को जोड़ते हुए बताया है कि लाल किले के बाद धमाके को अंजाम देने वाले डॉ. उमर की योजना दिल्ली या किसी धार्मिक महत्व के स्थान पर भीड़भाड़ वाली जगह पर कार में बम लगाकर गायब होने की थी। सह-आरोपी ने बताया कि डॉ. उमर में फिदायीन हमले के मंसूबे वाला आया बदलाव साल 2021 में सह-आरोपी डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई के साथ तुर्किये की यात्रा के बाद आई थी। तुर्की में उनकी मुलाकात जैश-ए-मोहम्मद के ओजीडब्ल्यू से मुलाकात हुई थी।

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तुर्की दौरे ने डॉ. उमर को बदल दिया

तुर्की दौरे के बाद डॉ. उमर और डॉ. गनई ने भारी मात्रा में विस्फोटक जमा करना शुरू कर दिया था। इसी के तहत 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जुटाए गए थे। अधिकांश विस्फोट अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर के पास ही जमा किया गया था। दोनों डॉक्टर अल फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे। दिसंबर में धमाका करने की उनकी साजिश तब नाकाम हो गई जब श्रीनगर पुलिस ने गनई को गिरफ्तार कर लिया और विस्फोटक भी बरामद कर लिए।

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घबरा गया था डॉ. उमर

डॉ. गनई की गिरफ्तारी और बिस्फोटक की बरामदगी के बाद डॉ. उमर घबरा गया था। इसके बाद उसने कार से फरीदाबाद छोड़ा और इधर-उधर घूमता रहा। अंत में वह लाल किले के बाहर पहुंचा जहां विस्फोट हो गया जिसमें 13 लोग मारे गए। बता दें कि 19 अक्टूबर को इस टेरर मॉड्यूल पर शक तब हुआ जब श्रीनगर के बाहरी इलाके नौगाम के बनपोरा में दीवारों पर जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर दिखे। इसके बाद श्रीनगर पुलिस ऐक्शन में आई और पूरे अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया।

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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