लाइफ डिटेक्टर, खोजी कुत्ते भी लगाए; दिल्ली इमारत हादसे में कैसे बचाई जा रहीं जानें?
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने के बाद एनडीआरएफ के जवान लाइफ डिटेक्टर, सर्च डॉग्स और आधुनिक कटिंग मशीनों की मदद से चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।

राजन शर्मा, नई दिल्ली
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला हॉस्टल के भरभराकर गिरने के बाद मलबे में दबे छात्रों को बचाने के लिए एनडीआरएफ के करीब 70 जवान अत्याधुनिक तकनीक और विशेष उपकरणों के साथ लगातार जुटे रहे। मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश बेहद चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन लाइफ डिटेक्टर, प्रशिक्षित सर्च डॉग्स और आधुनिक कटिंग मशीनों की मदद से रेस्क्यू टीमों ने संभावित स्थानों तक पहुंचकर छात्रों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया। ऑपरेशन में एनडीआरएफ ने सात छात्रों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
70 जवानों ने अलग-अलग हिस्सों में चलाया सर्च ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की दो टीमें मौके पर पहुंचीं और करीब 70 जवानों ने अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जरूरत पड़ने पर बचाव अभियान को आगे बढ़ाने के लिए दो अतिरिक्त टीमों को भी रिजर्व में रखा गया।
जीवन की तलाश, बड़ी चुनौती
मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि जवानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि भारी मलबे के नीचे कोई व्यक्ति जीवित फंसा है या नहीं।
खोजी कुत्तों की ली जा रही मदद
मलबे में दबे जीवित लोगों को बचाने के लिए लाइफ डिटेक्टर और प्रशिक्षित सर्च डॉग्स की मदद ली गई। जहां से जीवन के संकेत मिले, वहां जवानों ने बेहद सावधानी के साथ मलबा हटाने और कटिंग का काम शुरू किया। हॉस्टल के छात्रों और मौके पर मौजूद लोगों से मिली जानकारी को भी फंसे लोगों की संभावित लोकेशन तय करने में इस्तेमाल किया गया।
जहां जिंदगी के संकेत, वहीं बनाया रास्ता
फंसे लोगों की लोकेशन मिलने के बाद एनडीआरएफ ने ब्रीचिंग और कटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। डायमंड चेन सॉ से कंक्रीट काटा गया, जबकि हाइड्रोलिक जैक और कॉम्बी कटर की मदद से भारी हिस्सों को हटाकर अंदर पहुंचने का रास्ता बनाया गया।
प्लाज्मा कटर का इस्तेमाल
जरूरत पड़ने पर प्लाज्मा कटर का भी इस्तेमाल किया गया। रेस्क्यू के दौरान मलबे के दोबारा खिसकने का खतरा बना हुआ था। इसे देखते हुए अस्थिर हिस्सों को सहारा देने के लिए हाई-स्ट्रेंथ इन्फ्लेटेबल बैग और शोरिंग उपकरण लगाए गए। जवान हर कदम बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे थे, ताकि बचाव कार्य के दौरान अंदर फंसे लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे।
15 मिनट में अचेत युवक तक पहुंचे जवान
एनडीआरएफ की टीम ने जिंदगी के संकेत मिलने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए एक अचेत व्यक्ति को करीब 15 मिनट में मलबे से बाहर निकाल लिया। दो अन्य लोगों को करीब 30 मिनट में सुरक्षित बाहर निकाला गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में जवानों का लक्ष्य कम से कम समय में फंसे लोगों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना रहा।
देर रात तक तलाशी अभियान जारी
एनडीआरएफ की 16वीं बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर सुनील सिंह की निगरानी में देर रात तक सर्च ऑपरेशन जारी रहा। मलबे के हर हिस्से की बारीकी से जांच की गई, ताकि कहीं जिंदगी की हल्की सी भी आहट मिले तो जवान तुरंत वहां पहुंचकर बचाव अभियान शुरू कर सकें।


