
दिल्ली धमाका: उमर की मदद करने वाले शोएब के रिश्तेदार NIA के रडार पर, अब तक क्या-क्या हुआ?
दिल्ली धमाके के आरोपी डॉक्टर उमर की मदद करने वाले अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कर्मचारी शोएब के रिश्तेदार अब एनआईए की रडार पर हैं, खासकर उसकी साली पर जिन्होंने आरोपी डॉक्टर को किराए पर कमरा दिलाया था।
दिल्ली धमाके के आरोपी डॉक्टर उमर की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कर्मचारी शोएब के रिश्तेदार भी अब जांच एजेंसियों की रडार पर आ गए हैं। गांव धौज से लेकर जिला नूंह तक उसके रिश्तेदारों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया जा सकता है। आरोपी की साली पर खास नजर है। क्योंकि शोएब के कहने पर ही उन्होंने आरोपी डॉक्टर को किराए पर कमरा दिया था।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली धमाके के आरोपी की मदद करने के आरोपी शोएब अल-फलाह यूनिवर्सिटी में करीब छह साल से काम कर रहा था। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रिशियन था, कुछ उसे वार्ड बॉय भी बता रहे हैं। बहरहाल, यूनिवर्सिटी में ही वह आरोपी डॉक्टर उमर के सम्पर्क में आया। शोएब ने आतंकी डॉक्टर उमर को नूंह की हिदायत कॉलोनी में अपनी साली का कमरा किराये पर दिलाया था, जहां आरोपी 30 अक्तूबर से 10 नवंबर तक ठहरा था। यहीं से आरोपी डॉक्टर ने दिल्ली जाकर धमाका किया था। शोएब की साली मूल रूप से गोलपुरी गांव की निवासी थी और ससुराल हथीन क्षेत्र के खिल्लूका गांव में बताई गई थी।
नूंह में सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी आरोपी की कार
गौरतलब है कि दिल्ली धमाका से पहले आरोपी डॉक्टर उमर की कार जिला नूंह में अनेक जगह सीसीटीवी कैमरों कैद हुई थी। जिसके आधार पर जांच एजेंसियों ने मौके पर जांच की थी। जांच अधिकारियों को नूंह में गोयल अल्ट्रासाउंड एवं डायग्नोस्टिक सेंटर (बालाजी पेट्रोल पंप के पास, दिल्ली-अलवर रोड) के सीसीटीवी कैमरे से वह फुटेज मिला था, जिसमें संदिग्ध सफेद रंग की आई-20 कार साफ दिखाई दी थी। फुटेज से पहले भी डॉ उमर की यही कार दिल्ली-मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर कैमरे में रिकॉर्ड हुई थी। इससे उसकी आवाजाही का पैटर्न मिल रहा था, फिरोजपुर झिरका में रहने के दौरान डॉ उमर ने एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश की थी, जिसके सीसीटीवी फुटेज को एजेंसियां खंगाल रही थीं।
डॉ. आदिल और शाहीन को यूनिवर्सिटी लाने की तैयारी
दिल्ली धमाके से जुड़े आतंकी मॉड्यूल की जांच तेज कर दी है। डॉ. मुजम्मिल शकील की निशानदेही के बाद अब एनआईए आरोपी डॉ. आदिल अहमद और शाहीन सईद को फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी लेकर आएगी। जांच में सामने आया है कि आदिल और सुसाइड बॉम्बर उमर नबी में पुरानी दोस्ती थी। वह कई बार यूनिवर्सिटी आकर उमर के हॉस्टल फ्लैट में रुका और यहीं उसकी मुलाकात मुजम्मिल और शाहीन से हुई।
सूत्रों के अनुसार आदिल ने ही डॉ. मुजम्मिल को गांव फतेहपुर तगा और धौज में विस्फोटक छिपाने का आइडिया दिया था। इन इलाकों में आसानी से किराये पर जगह मिलना उसकी मुख्य वजह बताई जा रही है। सहारनपुर से गिरफ्तार आदिल ने पूछताछ में आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।
कब क्या हुआ
- 30 अक्तूबर को डॉक्टर मुजम्मिल को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार किया था
- 09 नवम्बर को जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस ने गांव धौज की कॉलोनी से डॉक्टर मुज़म्मिल के किराए के कमरे से 358 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और हथियार बरामद किए थे
- 10 नवम्बर को जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस ने गांव फतेहपुर तगा की कॉलोनी में डॉक्टर मुज़म्मिल के दूसरे किराए के कमरे से 2563 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया था
गिरफ्तारी की सूचना से सन्न रह गए सहकर्मी
वकील की गिरफ्तारी की सूचना जैसे ही अदालत और तहसील परिसर में यह सूचना पहुंची कि अधिवक्ता रिजवान को पाकिस्तान की आईएसआई आतंकी संगठन से संबंध होने के गंभीर आरोप में एनआईए, दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस की गठित टीमों द्वारा गिरफ्तार किया गया है, वैसे ही सहकर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच हड़कंप मच गया। सोहना बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने इस घटना पर आश्चर्य व्यक्त किया। उनके मुताबिक, रिजवान नियमित रूप से अदालत से संबंधित कार्यों में जुटा रहता था और उसके व्यवहार से किसी को भी उस पर संदेह नहीं हुआ। यह गिरफ्तारी इस क्षेत्र में कानून से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ा झटका है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती है। एनआईए अब रिजवान से जुड़े सभी मामलों और संपर्कों की गहनता से जांच कर रही है, ताकि उसके नेटवर्क और गतिविधियों का पर्दाफाश किया जा सके।
एनआईए ने पांच साल का रिकॉर्ड किया जब्त
एनआईए की टीम ने दोनों दुकानों पर लगभग 25 मिनट तक आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान अनाज मंडी में स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों की भीड़ जुट गई। एनआईए टीम ने भीड़ में फोटोग्राफी और किसी भी प्रकार की वीडियो बनाने वाले लोगों को सख्ती से रोका। एनआईए की टीम ने दोनों दुकानदारों का पांच साल पुराना रिकॉर्ड फरीदाबाद मंगवा लिया है। टीम रिकॉर्ड की बहुत ही बारीकी से जांच कर रही है ताकि अमोनियम नाइट्रेट की खरीद-बिक्री के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों का पता लगाया जा सके।





