
एक संग कई जगह धमाकों के लिए और कारें तैयार करने का था प्लान? दिल्ली ब्लास्ट में नया खुलासा
संक्षेप: दिल्ली कार ब्लास्ट केस की जांच में जुटी खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने गुरुवार को एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा किया, जो एक साथ कई जगहों पर हमला करने के लिए विस्फोटकों से लदे घातक वाहनों से जुड़ी थी।
दिल्ली कार ब्लास्ट केस की जांच में जुटी खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने गुरुवार को एक बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा किया, जो एक साथ कई जगहों पर हमला करने के लिए विस्फोटकों से लदे घातक वाहनों से जुड़ी थी।

सूत्रों के अनुसार, जब यह पता चला कि आरोपियों ने हमलों में संभावित इस्तेमाल के लिए एक i20 और एक ईकोस्पोर्ट कार को मॉडिफाई करने का काम शुरू कर दिया था, तब जांच का दायरा और बढ़ गया। जांचकर्ता अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम देने की किसी व्यापक योजना के तहत इसी तरह की अन्य गाड़ियां भी तैयार की जा रही थीं।
एक खुफिया सूत्र ने बताया कि i20 और ईकोस्पोर्ट के बाद यह बात सामने आई कि दो और पुरानी गाड़ियां तैयार करने की तैयारी चल रही थी, जिनमें विस्फोटक लगाया जा सकता था। इसके अलावा, जांच एजेंसियों ने बताया कि करीब 8 संदिग्ध कथित तौर पर चार जगहों पर एक साथ धमाके करने की तैयारी कर रहे थे। हर जोड़ी को एक विशिष्ट लक्ष्य शहर सौंपा गया था।
दो-दो के ग्रुप में आतंकियों के जाने की थी योजना
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि आरोपी ग्रुप दो-दो करके जाने की योजना बना रहे थे और हर एक ग्रुप एक साथ कई इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) लेकर हमला करने वाला था। जांच के दायरे में आने वालों में पिछले आतंकी मामलों से जुड़े लोग भी शामिल हैं, जिनमें लाल किला धमाके के आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, डॉ. उमर और शाहीन शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस देश के कई शहरों में सिलसिलेवार धमाकों की योजना से जुड़ी एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करने में सफल रही।
आरोपियों ने 20 लाख रुपये कैश जुटाए थे
सूत्रों से पता चला है कि आरोपियों ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपये कैश जुटाए थे, जो उमर को योजना पर खर्च के लिए सौंपे गए थे। इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से करीब 3 लाख रुपये का 20 क्विंटल एनपीके उर्वरक खरीदने के लिए किया गया था। इसका मकसद आईईडी तैयार करना था। एनपीके उर्वरक- नाइट्रोजन (एन), फॉस्फोरस (पी) और पोटेशियम (के) का ऐसा मिश्रण है जिसका इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री निकालने में किया जा सकता है। जांचकर्ताओं ने यह भी खुलासा किया है कि उमर ने हमलों को सुरक्षित रूप से अंजाम देने के लिए दो से चार सदस्यों वाला एक सिग्नल ऐप ग्रुप बनाया था।
आईएसआईएस की विंग अंसार गजवत-उल-हिंद जुड़ा था डॉ. मुजम्मिल
जांच एजेंसियों के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल मारे गए आतंकियों के साथियों के साथ संपर्क बनाए रखने के बाद 2021 और 2022 के बीच आईएसआईएस की एक विंग अंसार गजवत-उल-हिंद की ओर आकर्षित हुआ था। इरफान उर्फ मौलवी नाम के एक व्यक्ति ने उसे इस नेटवर्क जोड़ा था। माना जाता है कि 2023 और 2024 में बरामद हथियार इस मॉड्यूल द्वारा एक स्वतंत्र आतंकवादी ग्रुप बनाने की तैयारी के तहत हासिल किए गए थे।
जांच एजेंसियां व्यापक नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। उन्हें शक है कि आरोपियों ने निकट भविष्य में हमले को अंजाम देने की योजना बनाई थी।
फरीदाबाद में मिली उमर की लाल कार
इस बीच, फरीदाबाद पुलिस ने बुधवार को लाल रंग की ईकोस्पोर्ट DL 10 CK 0458 जब्त की है। इसके दिल्ली विस्फोट मामले के मुख्य संदिग्ध डॉ. उमर उन नबी से जुड़े होने का संदेह है। डॉ. उमर से जुड़ी होने का संदेह वाली लाल रंग की ईकोस्पोर्ट, खंडावली गांव के पास खड़ी पाई गई।
इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को पुष्टि की कि लाल किले के पास कार विस्फोट करने वाला व्यक्ति डॉ उमर उन नबी था। फॉरेंसिक डीएनए टेस्ट में उसके जैविक नमूने का उसकी मां के नमूने से मिलान हो गया था।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह पुष्टि कई दिनों तक किए गए विस्तृत फोरेंसिक विश्लेषण के बाद हुई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने खुलासा किया कि कार में विस्फोट के बाद उमर का पैर स्टीयरिंग व्हील और एक्सीलेटर के बीच फंसा हुआ पाया गया था, जिससे पता चलता है कि जब कार में विस्फोट हुआ, तब वह गाड़ी चला रहा था।
डीएनए प्रोफाइलिंग से मृतक की पहचान डॉ. उमर उन नबी के रूप में हुई है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "संबंध स्थापित करने के लिए उसके नमूने का मिलान उसकी मां के डीएनए से किया गया।"
बुधवार को डॉ. उमर की मां और भाई के डीएनए सैंपल एकत्र किए गए और उन्हें एम्स की फोरेंसिक लैब में भेजा गया, जहां उनका मिलान दिल्ली के लोक नायक अस्पताल (एलएनजेपी) में रखे शवों के अवशेषों से किया गया।





