दिल्ली-NCR में एक नहीं 4 वेदर सिस्टमों ने कराई भारी बारिश; आगे क्या संकेत?
दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार को भारी बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया। मौसम विभाग और मौसम विज्ञानियों की मानें तो इस जोरदार बारिश के पीछे चार वेदर सिस्टम थे। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…
दिल्ली-NCR में मंगलवार को भारी बारिश हुई। इससे जगह-जगह जलभराव से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई अहम रास्ते पानी में डूब गए जिससे ट्रैफिक ठप हो गया। मौसम विभाग की ओर से जोरदार बारिश को लेकर पहले येलो, फिर ऑरेंज और दोपहर 12:25 बजे रेड अलर्ट जारी किया गया। मौसम विज्ञानियों की मानें तो दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश के लिए एक नहीं वरन 4 वेदर सिस्टमों ने काम किया।
लो प्रेशर एरिया ने भी किया काम
दिल्ली-NCR में भारी बारिश के पीछे पहला फैक्टर मॉनसून का फिर से सक्रिय होना रहा। इसके साथ कई अन्य मौसम प्रणालियां भी जुड़ गईं। मौसम विभाग (IMD) ने अपने बुलेटिन में बताया कि मॉनसूनी ट्रफ दिल्ली के दक्षिण से होते हुए बीकानेर, ग्वालियर, सतना और डाल्टनगंज से पूर्व की ओर उस गहरे डिप्रेशन यानी कम दबाव वाले क्षेत्र के केंद्र तक पहुंच गई जो मंगलवार को तड़के पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा तटों पर पहुंचा।
कम दबाव तक जा पहुंची मॉनसूनी ट्रफ
सनद रहे मॉनसूनी ट्रफ मॉनसून सीजन के दौरान बारिश लाने वाली मुख्य रेखा मानी जाती है। यह एक्टिव हुई और दिल्ली से होकर पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के कम दबाव वाले क्षेत्र तक जा पहुंची। मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, साइक्लोनिक सर्कुलेशन की ऐक्टिव रहा। इनमें से एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर, दूसरा मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में जबकि अन्य दिल्ली-NCR के करीब भी एक्टिव है।
चार वेदर सिस्टम से भारी बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, एक ट्रफ के रूप में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ भी बना हुआ है। कुल मिलाकर मौसम विज्ञानियों की मानें तो जोरदार बारिश के पीछे मॉनसूनी ट्रफ का दोबारा एक्टिव होना और तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन का भी काम करना रहा।
दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश का मजबूत फैक्टर
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून के महीनों में कम दबाव की एक लंबी पट्टी बनती है जिसे 'मॉनसूनी ट्रफ' कहते हैं। यह पट्टी पाकिस्तान से लेकर बंगाल की खाड़ी तक गंगा के मैदानों से होकर गुजरती है। यह मॉनसूनी ट्रफ एक जगह टिकी नहीं रहती। इसका पूर्वी हिस्सा एक ही दिन में काफी आगे-पीछे खिसक सकता है। यह ट्रफ जहां रुकती है, वहीं बारिश होती है। जब यह दक्षिण की तरफ खिसकता है तो दिल्ली-NCR, मध्य और उत्तरी भारत में भारी बारिश होती है।
ऐसे मजबूत हो जाती है मॉनसूनी ट्रफ
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, राजस्थान की हवाएं और ओडिशा का कम दबाव मिलकर इस मॉनसूनी ट्रफ को ताकतवर बना देते हैं। इससे समुद्र से आने वाली नम हवाएं ठंडी होकर बादल बनती हैं और जमकर बारिश कराती हैं।
आगे क्या संकेत?
मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इसके चलते अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों के दिल्ली के न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तथा अधिकतम तापमान में 4 से 9 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई है। बारिश के असर से राजधानी के अधिकांश इलाकों में अधिकतम तापमान 28 से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।


