दिल्ली में बैन रहेगी ये फ्रांसीसी वोदका और स्कॉच; 3000 करोड़ के टैक्स बकाया का क्या है मामला
मशहूर फ्रांसीसी शराब ब्रांड एब्सोल्यूट वोदका और शिवास रीगल दिल्ली में बैन ही रहेंगे। हाई कोर्ट ने निर्माता कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया। कंपनी पर 3000 करोड़ का टैक्स बकाया है।

दिल्ली में एब्सोल्यूट वोदका (Absolut Vodka) और शिवास रीगल (Chivas Regal) जैसी शराब की बिक्री पर रोक बरकरार है। इसे बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी पेरनोड रिकार्ड को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कंपनी पर करीब 3000 करोड़ रुपये के टैक्स बकाया है। यह मामला दिल्ली के चर्चित 2021 शराब नीति विवाद से जुड़ा हुआ है। ईडी और दूसरी जांच एजेंसियों ने पेरनोड रिकार्ड पर आरोप लगाए थे कि कंपनी ने कुछ रिटेलर्स के साथ मिलकर अपनी बिक्री और मार्केट शेयर बढ़ाने की कोशिश की।
जांच एजेंसियों का दावा है कि कंपनी ने बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने और बिक्री बढ़ाने के लिए रिटेलर्स के साथ सांठगांठ की। इन्हीं आरोपों के आधार पर अधिकारियों ने कंपनी के लिकर लाइसेंस आवेदन को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट ने आज कंपनी को राहत नहीं दी।
तीन साल से दिल्ली में बैन
पेरनोड रिकार्ड साल 2023 से दिल्ली में अपने प्रोडक्ट नहीं बेच पा रही है। इसकी वजह दिल्ली की नई आबकारी नीति से जुड़ा विवाद और जांच है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंपनी ने 2021 की शराब नीति के दौरान कुछ कारोबारियों और रिटेलर्स के साथ मिलकर बाजार में अपना हिस्सा बढ़ाने के लिए गलत तरीके अपनाए। दिल्ली सरकार ने कंपनी के शराब लाइसेंस आवेदन को भी खारिज कर दिया था। सरकार का कहना था कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने कंपनी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
टैक्स चोरी का भी आरोप
कंपनी एक और बड़े विवाद में फंसी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जांच एजेंसियों ने पाया है कि पेरनोड रिकार्ड ने स्कॉच व्हिस्की के आयात में कई अहम जानकारियां छिपाईं। कंपनी ने अपनी व्हिस्की की ऐज और उसमें इस्तेमाल सामग्री की सही जानकारी नहीं दी। आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि शराब की कीमत कम दिखाई जा सके और कम टैक्स देना पड़े।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने अपने आयात दस्तावेजों में अलग-अलग कोड और नामों का इस्तेमाल किया। इससे कस्टम अधिकारियों को असली जानकारी समझने और दूसरे ब्रांड से तुलना करने में मुश्किल हुई। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह सब जानबूझकर किया गया।
3 हजार करोड़ का टैक्स बकाया
गौरतलब है कि भारत में विदेशी शराब पर करीब 150 प्रतिशत तक भारी आयात शुल्क लगता है। वहीं, पेरनोड रिकार्ड पर स्कॉच की कीमत करीब 67 प्रतिशत तक कम दिखाकर टैक्स बचाने का आरोप है। इन आरोपों के बाद कंपनी को 3 हजार करोड़ रुपये का बकाया टैक्स भरने का नोटिस दिया गया है। अगर अदालत में कंपनी केस हार जाती है तो जुर्माना और अन्य शुल्क मिलाकर यह रकम 5,700 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच सकती है।
कंपनी का क्या दावा
हालांकि पेरनोड रिकार्ड ने खुद पर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। कहना है कि वह पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर काम करती रही है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह इस मामले को कानूनी तरीके से लड़ रही है और उसे अपनी स्थिति पर भरोसा है। बता दें कि दुनियाभर में पेरनोड रिकार्ड के लिए भारत शराब का सबसे बड़ा बाजार है। बिक्री के लिहाज से कंपनी को भारत से सबसे ज्यादा फायदा होता है। अकेले दिल्ली में कंपनी की भारत में कुल बिक्री का करीब पांच प्रतिशत हिस्सा था।
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