दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र, क्यों हाथ में काली पट्टी बांधकर पहुंचे भाजपा के विधायक

Gaurav Kala रणविजय सिंह, हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली विधानसभा में आज विशेष सत्र का आयोजन हो रहा है। महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास न होने के विरोध में भाजपा सरकार विधानसभा में निंदा प्रस्ताव लाएगी। इस दौरान भाजपा विधायक काली पट्टी बांधकर पहुंचे।

दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र, क्यों हाथ में काली पट्टी बांधकर पहुंचे भाजपा के विधायक

Delhi Assembly Special Session: महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दिल्ली विधानसभा में विशेष सत्र का आयोजन हो रहा है। विशेष सत्र में भाजपा ने विपक्ष पर महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है और कई भाजपा शासित राज्यों ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए इसी तरह के विशेष विधानसभा सत्र बुलाए हैं। इस दौरान विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा। भाजपा विधायक काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे हैं।

विधानसभा में काली पट्टी बांध पहुंचे हैं भाजपा विधायक

दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में भाजपा विधायक हाथ पर काली पट्टी बांध कर पहुंचे हैं। इसके जरिये पिछले दिनों लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने पर अपना विरोध जताया। सदन में नियम 280 के तहत विधायक हाथ पर काली पट्टी बांध कर ही अपने क्षेत्र की समस्याएं उठा रहे हैं। बाद में विधानसभा के इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा होगी।

भाजपा विधायक विपक्ष पर हमलावर

इससे पहले भाजपा विधायक हरीश खुराना ने विपक्ष पर महिलाओं के अधिकार छीनने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल को रोककर विपक्ष ने महिलाओं के हक को खत्म करने का काम किया है। खुराना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा थी कि संसद की सीटें बढ़ाकर 850 करने के बाद 2029 में महिलाओं को उनका अधिकार दिया जाए, लेकिन विपक्ष ने इस प्रक्रिया को रोक दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली और देश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं कर रही है।

भाजपा विधायक के मुताबिक, इसी मुद्दे को लेकर आज विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें निंदा प्रस्ताव पेश किया जाएगा और उसे पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा देश की सभी महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए काम करती रहेगी। दिल्ली सचिवालय अधिकारियों ने बताया कि महिला आरक्षण मुद्दे पर चर्चा के लिए यह सत्र संभवतः एक दिन का होगा, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

देश की बहन-बेटियों को उनका हक दिलाएंगे

दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के अधिकार छीन लिए हैं। सिरसा ने कहा कि कांग्रेस कई वर्षों से महिला आरक्षण लाने की बात करती रही, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं कर पाई। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ विश्वासघात बताया और कहा कि आज निंदा प्रस्ताव के जरिए इस मुद्दे को उठाया जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिला आरक्षण बेहद जरूरी है और अब समय आ गया है कि देश की बहनों और बेटियों को उनका हक दिया जाए।

प्रथम विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि

सदन में पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। साथ ही प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए करीब 75 हजार भारतीय सैनिकों को विधायकों ने एक मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 108 वर्ष पहले 28 अप्रैल 1918 को दिल्ली विधानसभा के इस ऐतिहासिक भवन के इसी चेंबर में एक ऐतिहासिक युद्ध सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इसमें देश भर से 120 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसमें राजवाड़ों व नेताओं के प्रतिनिधि शामिल थे।

इसमें प्रथम विश्व युद्ध में भारत की भूमिका पर चर्चा की गई थी। इस सम्मेलन में फैसला हुआ था कि भारतीय सैनिक युद्ध में ब्रिटिश हुकूमत की तरफ से। इस सम्मेलन में महात्मा गांधी मौजूद थे, उन्होंने पूर्ण सहयोग का भरोसा इस विश्वास के साथ दिया था कि भारत के इस निष्ठा का पुरस्कार स्वराज के रूप में मिलेगा। लेकिन यह विश्वास छला गया। 13 लाख भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से प्रथम विश्व युद्ध में मोर्चा संभाला। करीब 74 हजार भारतीय सैनिक ब्रिटिश हुकूमत के लिए लड़ते हुए शहीद हुए। बदले में मिला रॉलेक्ट एक्ट और जलियांवाला बाग। लेकिन भारत के उन वीर शहीदों ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए प्रथम विश्व युद्ध में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

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