
बादलों में कैसे किया गया छेद! दिल्ली के आसमान से आया अनोखा वीडियो
जिस कृत्रिम बारिश के बारे में दिल्लीवाले पिछले कई सालों से सुनते आ रहे हैं उसका इंतजार अब खत्म हो गया है। दिल्ली में मंगलवार को क्लाउड सीडिंग का दूसरा ट्रायल पूरा कर लिया गया।
जिस कृत्रिम बारिश के बारे में दिल्लीवाले पिछले कई सालों से सुनते आ रहे हैं उसका इंतजार अब खत्म हो गया है। दिल्ली में मंगलवार को क्लाउड सीडिंग का दूसरा ट्रायल पूरा कर लिया गया। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने ट्रायल के बाद चार घंटों के भीतर बारिश की संभावना जताई। इस बीच इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि किस तरह विमान के विंग में लगे उपकरण से रसायनों का छिड़काव करके बादलों को बरसने के लिए मजबूर जा रहा है। सरल भाषा में यह भी कह सकते हैं कि तकनीक के सहारे बादलों में छेद कर दिया गया।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि उनकी सरकार ने आईआईटी-कानपुर के सहयोग से दिल्ली के कुछ हिस्सों में कृत्रिम बारिश का ट्रायल किया और अगले कुछ दिनों में इस तरह के और ट्रायल किए जाने की योजना है। अधिकारियों ने बताया कि कृत्रिम बारिश के लिए विमान ने कानपुर से दिल्ली के लिए उड़ान भरी और मेरठ की हवाई पट्टी पर उतरने से पहले बुराड़ी, उत्तरी करोल बाग और मयूर विहार जैसे क्षेत्रों में बादलों के नजदीक जाकर रसायनों का छिड़काव किया।
सिरसा ने एक वीडियो बयान में कहा कि सेसना विमान ने कानपुर से उड़ान भरी। इसने आठ चरणों में रसायनों का छिड़काव किया और परीक्षण आधे घंटे तक चला। मंत्री ने कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर का मानना है कि परीक्षण के 15 मिनट से चार घंटे के भीतर बारिश हो सकती है। सिरसा ने बताया कि अगले कुछ दिनों में 9-10 ट्रायल की योजना है।
मंत्री ने बताया कि क्लाउड सीडिंग में कुल 8 फ्लेयर्स का उपयोग किया गया। प्रत्येक फ्लेयर का वजन लगभग 2 से 2.5 किलोग्राम था। इन फ्लेयर्स ने बादलों में विशेष पदार्थ छोड़ा। बादलों में उस समय 15 से 20 प्रतिशत आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) थी। यह प्रक्रिया लगभग आधे घंटे तक चली और इस दौरान एक फ्लेयर करीब 2 से 2.5 मिनट तक जलता रहा।
बादलों में नमी का अभाव
पिछले हफ्ते बुराड़ी के आसमान में भी विमान ने एक परीक्षण उड़ान भरी थी। परीक्षण के दौरान, विमान से कृत्रिम वर्षा कराने वाले ‘सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड यौगिकों’ की सीमित मात्रा का छिड़काव किया गया था। हालांकि, बारिश वाले बादलों का निर्माण करने के लिए हवा में कम से कम 50 प्रतिशत नमी होनी चाहिए लेकिन नमी 20 प्रतिशत से भी कम होने की वजह से बारिश नहीं हुई। मंगलवार को भी नमी की मात्रा कम पाई गई। इसलिए बारिश की संभावना अधिक नहीं है।





