
दिल्ली के 14 इलाकों में AQI 400 पार, 4 वजहें जिनसे नहीं मिल रही पलूशन से राहत
दिल्ली के लोगों के लिए पलूशन से राहत नहीं मिल रहा है। दिल्ली का औसत AQI रविवार को 377 दर्ज किया गया जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। हालांकि इसमें मामूली सुधार हुआ है। विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…
दिल्ली के लोगों के लिए प्रदूषित हवा से राहत नहीं मिल रही है। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) रविवार को 377 दर्ज किया गया जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। हालांकि पिछले दिन के मुकाबले इसमें मामूली सुधार हुआ है। फिर भी दिल्ली के 14 इलाके ऐसे थे जहां पलूशन का स्तर 400 के पार यानी 'गंभीर' श्रेणी में रिकॉर्ड किया गया। वजीरपुर, बवाना, आनंद विहार और चांदनी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में पलूशन ज्यादा देखा गया।
इन 4 वजहों से बढ़ा पलूशन
1- दरअसल तेज हवा चलने से पलूशन के कणों को छंटने में आसानी होती है। मौजूदा वक्त में हवा की स्पीड भी धीमी है। इससे पलूशन के कणों में बिखराव नहीं हो पा रहा है।
2- कोहरे के साथ पलूशन का के मिलने से स्मॉग बन रहा है। कोहरे के कारण सुबह और शाम के वक्त पलूशन की समस्या ज्यादा देखी जा रही है।
3- इस सीजन में पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी बारिश देखने को मिलती है लेकिन कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ नहीं आने से बारिश भी नहीं हो रही है। इससे धूल के कणों का बिखराव बना हुआ है।
4- दिल्ली एनसीआर में कड़ाके की ठंड पड़ने से पलूशन के कण वायुमंडल में नीचे ही बने हुए हैं।सर्दी के मौसम में हवा भारी हो जाती है, जिसकी वजह से हवा में मौजूद पलूशन के कण वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पाते और धरती की सतह के पास ही जमे रहते हैं, जिससे प्रदूषण का असर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। दिल्ली में प्रदूषण के पुराने कारण तो अब भी वैसे ही बने हुए हैं, लेकिन कूड़ा और लकड़ियां जलाने से होने वाला धुआं अब और ज्यादा बढ़ गया है।
मानसून में साफ हुई थी हवा
दिल्ली में इस बार मानसून के दौरान सामान्य से काफी अच्छी बारिश हुई थी। मई के महीने में पश्चिमी विक्षोभ और फिर जून से सितंबर तक मानसून की वजह से हुई ज्यादा बारिश ने दिल्ली की हवा को पहले के मुकाबले काफी साफ-सुथरा रखा था। लेकिन जैसे ही मानसून खत्म हुआ, हवा में प्रदूषण के कण फिर से बढ़ने लगे।
14 अक्टूबर से समस्या बरकरार
इस सीजन में पहली बार 14 अक्टूबर को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में दर्ज की गई थी। दुख की बात यह है कि उसके बाद से अब तक एक दिन भी ऐसा नहीं आया है जब वायु गुणवत्ता का स्तर (AQI) 200 से नीचे रहा हो, यानी दिल्ली वाले लगातार ही प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
मानक से 3 गुना अधिक पलूशन
दिल्ली-एनसीआर की हवा में पीएम 2.5 का औसत स्तर दो बजे 181.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर रहा। वहीं पीएम 10 का औसत स्तर दिन में दो बजे 296.4 रिकॉर्ड किया गया। मानकों के अनुसार, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 से और पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। इस हिसाब से दिल्ली-एनसीआर की हवा में लगभग तीन गुना से अधिक पलूशन मौजूद है।

राहत के नहीं आसार
दिल्ली के साथ ही हवा में अभी पलूशन कणों में बहुत ज्यादा बिखराव की संभावना नहीं दिख रही है। कल तक किसी बड़ी मौसमी परिघटना के आसार नहीं हैं। इसके चलते दिल्ली की हवा में भी बहुत ज्यादा सुधार नहीं दिख रहा है। मौसम विभाग की मानें तो परसों यानी 23 दिसंबर से हवा की रफ्तार बढ़ने की संभावना है। इससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। दिल्ली के वजीरपुर, बवाना, आनंद विहार समेत कुल 14 इलाके ऐसे थे जहां AQI 400 के पार यानी 'गंभीर' श्रेणी में रिकॉर्ड किया गया।





