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दिवाली आते ही दिल्ली के एनिमल एक्टिविस्ट्स को सताने लगा कौन सा डर, क्या वजह?

दिवाली आते ही दिल्ली के एनिमल एक्टिविस्ट्स को सताने लगा कौन सा डर, क्या वजह?

संक्षेप: जानवर प्रेमियों का कहना है कि पिछले वर्षों में जब पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध था,तब भी लोगों को खुलेआम इस आदेश का उल्लंघन करते देखा गया था। अब उन्हें लगता है कि ग्रीन पटाखों को बेचने की सरकारी अनुमति से अधिक लोग पटाखे जला सकते हैं। 

Thu, 16 Oct 2025 06:03 PMUtkarsh Gaharwar नई दिल्ली, पीटीआई
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दिल्लीवाले इस बार पटाखे फोड़ सकते हैं। अंतर बस इतना होगा कि ये ग्रीन पटाखे होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ इसकी इजाजत भी दे दी है। इस बीच जानवर प्रेमियों को एक डर सता रहा है। दिवाली आते ही उन्हें आवारा जानवरों को लेकर चिंता बढ़ गई है। एनिमल एक्टिविस्ट्स का मानना है कि 'इको-फ्रेंडली' पटाखों की वापसी से अधिक लोग इनका गलत इस्तेमाल करने के लिए उत्साहित हो सकते हैं।

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जानवर प्रेमियों का कहना है कि पिछले वर्षों में जब पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध था,तब भी लोगों को खुलेआम इस आदेश का उल्लंघन करते देखा गया था। अब उन्हें लगता है कि ग्रीन पटाखों को बेचने की सरकारी अनुमति से अधिक लोग पटाखे जला सकते हैं,जिससे त्योहार के दौरान जानवरों को होने वाली परेशानी और भी बढ़ सकती है।

'पीपल फॉर एनिमल्स' की मंता सिद्धू ने कहा कि कानून को लागू करना हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। जब पूरी तरह से प्रतिबंध था,तब भी जानवरों के साथ क्रूरता और उनके परेशान होने के मामले आम थे। अब आंशिक छूट मिलने से हमें चिंता है कि ये संख्याएं फिर से बढ़ सकती हैं।

राजधानी भर के पशु शेल्टरों ने पहले ही एक व्यस्त सप्ताह के लिए तैयारी शुरू कर दी है। दिल्ली की एक पशु चिकित्सक (वेटेरिनेरियन) डॉ.मीनाक्षी ने कहा,"हर साल दिवाली के आस-पास कुत्तों के काटने की चोटें लगभग दोगुनी हो जाती हैं। इस साल संख्या बढ़ने की पूरी संभावना है,क्योंकि अधिक लोग फिर से पटाखे चला सकते हैं।"

उन्होंने बताया कि आवारा कुत्ते पटाखों की तेज आवाज और तेज रोशनी से डर जाते हैं। कई कुत्ते डरकर सड़कों पर अंधाधुंध भागते हैं,जिससे वे घायल हो जाते हैं या डर के मारे हमला कर बैठते हैं। उन्होंने कहा,"समस्या उत्सव नहीं है,बल्कि यह है कि इसे कितनी लापरवाही और कभी-कभी तो क्रूरता के साथ किया जाता है।"

डॉ.मीनाक्षी ने आगे कहा कि भले ही ग्रीन पटाखों से धुआं कम निकलता हो,लेकिन उनकी आवाज और अचानक होने वाले धमाके जानवरों को अब भी गहरा सदमा देते हैं। उन्होंने कहा,"यह संस्कृति या परंपराओं का विरोध करने के बारे में नहीं है,लेकिन दिवाली को अन्य जीवित प्राणियों को डराए या चोट पहुंचाए बिना भी मनाया जा सकता है।" शहर में पक्षी एम्बुलेंस सेवा चलाने वाले विद्या सागर जीव दया परिवार एनजीओ के अमित जैन ने कुछ परेशान करने वाली घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लोग आधे जले हुए पटाखों को कूड़ेदानों में फेंक देते हैं,जिन्हें बाद में चरने वाले जानवर (grazing animals) खा लेते हैं।

विद्या सागर जीव दया परिवार एनजीओ के अमित जैन ने बताया कि किस तरह की दर्दनाक घटनाएं सामने आती हैं,"गाय कूड़ा खा लेती हैं और उनके पेट में जाकर पटाखे जल उठते हैं। यह बहुत दर्दनाक और भयावह होता है। कुछ लोग तो मज़े के लिए जानवरों पर जलते हुए पटाखे भी फेंकते हैं।" उन्होंने ग्रीन पटाखों पर कहा कि ये भले ही वायु प्रदूषण में कुछ मदद करें,लेकिन इनकी आवाज और रोशनी अब भी जानवरों में घबराहट पैदा करती है। इन्हें केवल खुले इलाकों में,पेड़ों या पशु आश्रय गृहों से दूर ही जलाएं और कूड़ेदानों में फेंकने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि ये पूरी तरह से बुझ चुके हैं।

चोटों के मामलों में वृद्धि पर चांदनी चौक में क्लिनिक चलाने वाले पशु चिकित्सक (वेटेरिनेरियन) डॉ. रामेश्वर यादव ने कहा कि हर साल जानवरों को लगने वाली चोटों का दायरा बढ़ता जा रहा है।उन्होंने कहा,"कबूतर और तोते से लेकर मोर और आवारा कुत्तों तक सभी पीड़ित होते हैं। इस अवधि के दौरान हमारे पास कम से कम 100 मामले आते हैं।" पहले उन्हें ज्यादातर पक्षी ही मिलते थे,जैसे जलने या पंख टूटने वाले तोते,कबूतर और चील।अब उन्हें कुत्ते और गाय के मामले भी मिलने लगे हैं।

पशु विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि ग्रीन पटाखे पर्यावरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है,लेकिन वे इस बात पर जोर देते हैं कि 'ग्रीन' का मतलब जानवरों के लिए सुरक्षित नहीं है। एक कार्यकर्ता ने कहा कि यह त्योहार दयालुता और रोशनी का है,डर और चोट का नहीं। ग्रीन पटाखे सावधानी के साथ जलाए जा सकते हैं, लेकिन लोगों को यह याद रखना होगा कि उनका उत्सव किसी अन्य प्राणी की सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

पशु बचाव समूहों (Animal rescue groups) ने निवासियों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और घायल जानवरों या क्रूरता के मामलों की सूचना तुरंत दें। जैन ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि दिवाली का मतलब है हर किसी के जीवन में खुशी लाना और हम बस उम्मीद करते हैं कि लोग याद रखेंगे कि इसमें जानवर भी शामिल हैं।"

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें
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