
दिल्ली में दमघोंटू हवा से राहत नहीं, मानकों से पौने तीन गुना ज्यादा जहरीली
बीते डेढ़ महीने से दिल्ली की हवा में कोई सुधार नहीं हुआ है, शनिवार को भी राजधानी का औसत AQI 330 रहा जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है और प्रदूषण के कण मानकों से पौने तीन गुना अधिक होने के कारण अस्थमा के मरीजों और बुजुर्गों को सबसे ज़्यादा परेशानी हो रही है।
बीते तकरीबन डेढ़ महीने से जहरीली हवा में सांस ले रहे राजधानी के लोगों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही है। शनिवार को दिल्ली की हवा में मानकों से पौने तीन गुना ज्यादा प्रदूषक मौजूद रहे। इस दौरान ज्यादातर निगरानी केन्द्रों का वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 से ऊपर यानी बहुत खराब श्रेणी में बना हुआ है।
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि अगले तीन-चार दिनों के बीच भी दिल्ली में एक्यूआई का स्तर इसी के आसपास रहेगा। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली में प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना संभव नहीं हो पा रहा है। मौसम के कारक इस तरह हैं कि जो भी प्रदूषण पैदा हो रहा है वह वायुमंडल में ज्यादा देर तक बना रह रहा है। इसके चलते लोगों को लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेना पड़ रहा है। 14 अक्तूबर को दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंची थी। इसके बाद से एक दिन भी ऐसा नहीं रहा है जब एक्यूआई 200 से नीचे आया हो। इस दौरान वायु गुणवत्ता का स्तर खराब, बहुत खराब और गंभीर श्रेणी में रहा।
मानकों के मुताबिक हवा में पीएम 10 का स्तर 100 से और पीएम 2.5 का स्तर 60 से कम होने पर ही उसे स्वास्थ्यकारी माना जाता है। शनिवार शाम दिल्ली-एनसीआर की हवा में पीएम 10 का औसत स्तर 275.7 और पीएम 2.5 का औसत स्तर 157.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर रहा। यानी दिल्ली-एनसीआर की हवा में मानकों से पौने तीन गुना ज्यादा प्रदूषक कण हैं।
लगातार बढ़ रहा प्रदूषण
राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर बीते दो दिनों से लगातार बढ़ रहा है। सीपीसीबी के मुताबिक शनिवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 330 रहा। इस स्तर की हवा को बहुत खराब श्रेणी में रखा जाता है। एक दिन पहले शुक्रवार को सूचकांक 327 के अंक पर रहा था। वहीं, गुरुवार को एक्यूआई 304 था।
सेहत बिगाड़ रहा प्रदूषण
- सांस लेने में परेशान हो रही है। अस्थमा के मरीजों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कतें हो रही हैं।
- आंखों में जलन और संक्रमण की बीमारी बढ़ रही है। गले में खरास, खांसी, दर्द की समस्या बढ़ी है।
- फेफड़ों पर बुरा असर पड़ रहा है। थकान, घबराहट और सिरदर्द से पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है।
अगले तीन-चार दिनों तक राहत के संकेत नहीं
लोगों को अभी प्रदूषित हवा से राहत मिलने के आसार नहीं है। दिल्ली में प्रदूषण पैदा करने वाले स्रोत पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं। इनकी प्राकृतिक तौर पर सफाई नहीं हो पा रही है। बारिश या तेज हवा प्रदूषक कणों को साफ कर सकते हैं, लेकिन अभी ऐसी मौसमी गतिविधि की संभावना कम है। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली का अनुमान है कि अगले तीन-चार दिन एक्यूआई बहुत खराब श्रेणी में रहेगा।





