दिल्ली में रेड लाइट हटाने की तैयारी; क्या आपकी सड़क भी है लिस्ट में, जानें कैसे होगा ट्रैफिक कंट्रोल?
Delhi traffic signal removal plan: दिल्ली में ट्रैफिक जाम कम करने के लिए 25 प्रमुख सड़कों और कॉरिडोर से ट्रैफिक सिग्नल हटाने की तैयारी है। उनकी जगह 'बैक-टू-बैक यू-टर्न' मॉडल लागू किया जाएगा। जानिए किन सड़कों पर यह व्यवस्था लागू होगी, यह कैसे काम करेगी और इससे लोगों को क्या फायदा मिलेगा।

Delhi traffic signal removal plan: अगर आप रोज दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक जाम से परेशान रहते हैं, तो आने वाले समय में आपको बड़ी राहत मिल सकती है। राजधानी के 25 सबसे व्यस्त कॉरिडोर पर ट्रैफिक सिग्नल हटाकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है। इसकी जगह 'Back-to-Back U-Turn Model' लागू किया जाएगा, जिससे वाहन बिना बार-बार रुकावट के आगे बढ़ सकेंगे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने तकनीकी जांच के बाद इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब लोक निर्माण विभाग (PWD) चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने की तैयारी कर रहा है।
क्या है Back-to-Back U-Turn Model?
नई योजना के तहत जिन सड़कों पर ट्रैफिक सिग्नल हटाए जाएंगे, वहां वाहनों को सीधे आगे बढ़ने दिया जाएगा। यदि किसी वाहन को दूसरी दिशा में जाना होगा, तो वह आगे बने निर्धारित यू-टर्न से घूमकर अपने रास्ते पर लौटेगा। इससे चौराहों पर बार-बार रुकने की जरूरत कम होगी और ट्रैफिक का प्रवाह लगातार बना रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि इस मॉडल से ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और ईंधन की भी बचत होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर बहुत कम दूरी में कई ट्रैफिक सिग्नल हैं। उदाहरण के लिए, भर्तेंदु हरिश्चंद्र मार्ग पर केवल दो किलोमीटर के भीतर 11 ट्रैफिक सिग्नल हैं। वहीं पूर्वी दिल्ली के रोड नंबर-71 पर डेढ़ किलोमीटर के अंदर छह जगह वाहनों को रुकना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार रुकने और चलने की वजह से ट्रैफिक और ज्यादा बढ़ जाता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए यह नया मॉडल अपनाया जा रहा है।
किन सड़कों पर लागू होगी नई व्यवस्था?
योजना के तहत राजधानी के 25 प्रमुख कॉरिडोर शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से नीचे लिस्ट में दिए गए प्वाइंट शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम दिल्ली के कई अन्य व्यस्त मार्ग भी इस योजना में शामिल हैं। प्रत्येक सड़क पर काम शुरू करने से पहले विस्तृत तकनीकी और सुरक्षा जांच की जाएगी।
- नजफगढ़ रोड
- भर्तेंदु हरिश्चंद्र मार्ग
- जीटी रोड (जीटी करनाल बाइपास फ्लाईओवर से आजादपुर)
- राजौरी गार्डन-करमपुरा कॉरिडोर
- पंजाबी बाग से टिकरी बॉर्डर मार्ग
- मथुरा रोड (आश्रम-अपोलो-बदरपुर)
- महरौली-गुरुग्राम रोड
- आउटर रिंग रोड (नेहरू प्लेस से राव तुला राम फ्लाईओवर)
- रोड नंबर-71 (योजना विहार क्षेत्र)
- आईटीओ कॉरिडोर
- कालिंदी कुंज क्षेत्र
- एयरपोर्ट से जुड़े प्रमुख मार्ग
- पंखा रोड
- महरौली-साकेत-संगम विहार बेल्ट
फ्लाईओवर की जगह U-Turn मॉडल पर क्यों जोर?
सरकार का कहना है कि हर जगह फ्लाईओवर या अंडरपास बनाना संभव नहीं है। कई इलाकों में जगह की कमी, मेट्रो लाइन और घनी आबादी के कारण बड़े निर्माण कार्य मुश्किल होते हैं। ऐसे में कम लागत में ट्रैफिक सुधारने के लिए Back-to-Back U-Turn मॉडल बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
लोगों को क्या होगा फायदा?
यदि योजना सफल रही तो लोगों को कई फायदे मिल सकते हैं।
- ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने का समय कम होगा।
- यात्रा पहले से तेज होगी।
- पेट्रोल और डीजल की बचत होगी।
- जाम में कमी आने से प्रदूषण भी घट सकता है।
- रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
अभी क्या है आगे की प्रक्रिया?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस प्रस्ताव को तकनीकी रूप से मंजूरी दे दी है। इस दौरान सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) की भी राय ली गई है। अब PWD और ट्रैफिक पुलिस मिलकर प्रत्येक कॉरिडोर का विस्तृत सर्वे करेंगे। सुरक्षा और व्यवहार्यता की जांच पूरी होने के बाद चरणबद्ध तरीके से ट्रैफिक सिग्नल हटाने और नई व्यवस्था लागू करने का काम शुरू किया जाएगा। अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर बिना बार-बार रेड लाइट पर रुके सफर करना संभव हो सकता है।


