दिल्ली में SIR शुरू होने से पहले ही कट गए थे 11 लाख वोटरों के नाम, चुनाव आयोग ने बताईं ये 2 वजह
राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुई एसआईआर प्रक्रिया में करीब 48 लाख वोटरों के नाम कटने की बात तो सबको पता है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि यहां एसआईआर से पहले ही 11 लाख नाम काट दिए गए थे।

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से पहले ही जनवरी 2025 से लेकर जून 2026 के बीच बीते 16 महीनों में करीब 11 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। दिल्ली सीईओ ऑफिस के मुताबिक, 11 लाख नाम हटाए जाने की वजह वोटर लिस्ट में नियमित तिमाही संशोधन और BLO की गलतियां हैं। बता दें कि दिल्ली में SIR प्रक्रिया 30 जून को शुरू हुई थी, इसके प्रथम चरण में करीब 48 लाख नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं। यह आंकड़ा 20 जून तक दर्ज 1.45 करोड़ वोटरों की संख्या का करीब एक-तिहाई है।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के डेटा से पता चलता है कि जनवरी 2025 और जून 2026 के बीच लगभग 11 लाख नाम हटा दिए गए थे। यह संख्या 2025 में दिल्ली के कुल वोटरों का लगभग 7.07% और अभी 11.32% है।
वोटरों को नहीं थी नाम कटने की जानकारी
एचटी ने दिल्ली में करीब 15 ऐसे लोगों से बात की जिन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि बीते 16 महीने की अवधि के दौरान उनके नाम हटा दिए गए थे। इसका परिणाम यह हुआ कि SIR के लिए उनके अधूरे भरे हुए फॉर्म कभी जेनरेट नहीं हुए और ना ही वे उनके बूथ-लेवल अधिकारियों (BLO) तक पहुंचे और उन्हें खुद को एनरोल करने का मौका कभी नहीं मिला।
नाम जुड़वाने को दोबारा भरना होगा फॉर्म
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मुबारकपुर डबास में रहने वाली पूजा देवी ने बताया कि वह एक घरेलू कामगार हैं और उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट डाला था। पूजा ने बताया, “जब SIR की प्रक्रिया शुरू हुई तो मेरे अलावा मेरे परिवार में सभी को SIR फॉर्म मिला। हम कई बार BLO के पास गए, लेकिन उन्होंने कहा कि मेरा नाम लिस्ट में नहीं है और मुझे बाद में फॉर्म 6 भरकर नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराना होगा।”
काटे गए 11 लाख नामों में से लगभग 3 लाख नाम मई 2026 से जून 2026 के बीच प्री-SIR मैपिंग चरण के दौरान हटाए गए थे। जनवरी 2025 में दिल्ली की वोटर लिस्ट में 1,56,14,000 वोटर दर्ज थे। जून 2026 तक यह संख्या घटकर 1,45,10,299 हो गई थी। अब यह संख्या 97,53,577 है।
दिल्ली में पहले हुई ऐसी प्रक्रियाओं की तुलना में जनवरी 2025 और जून 2026 के बीच हटाए गए लोगों की संख्या असामान्य है। चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच दिल्ली के वोटरों की संख्या में 4 लाख की बढ़ोतरी हुई और फिर 2024 के लोकसभा चुनावों और 2025 के विधानसभा चुनावों के बीच भी 4 लाख लोग बढ़े। इसका मतलब है कि वोटर लिस्ट में नाम हटाने के मुकाबले नाम जोड़ने का काम अधिक हुआ।
दिल्ली चुनाव कार्यालय की क्या दलील
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि 11 लाख नामों को हटाने की वजह नियमित तिमाही रोल संशोधन और BLO की गलतियां हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "भले ही यह संख्या ज्यादा है, लेकिन हो सकता है कि उस एक साल में नियमित संशोधन के दौरान ये नाम हटाए गए हों। यह हो सकता है कि BLO ने मई और जून में प्री-SIR मैपिंग के दौरान भी नाम हटाए हों।" “ये लोग फॉर्म 6 भरकर फिर से वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा सकते हैं।”
वोटर लिस्ट में लगातार होते रहते हैं बदलाव
दरअसल, यह बात सही है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने का काम लगातार चलता रहता है। अगर लिस्ट को फ्रीज नहीं किया गया है तो फॉर्म 6 का इस्तेमाल करके नाम जोड़े जा सकते हैं और फॉर्म 7 का इस्तेमाल करके नाम हटाए जा सकते हैं।


