
पिता से भरण-पोषण भत्ते की कानूनी जंग में बेटी की जीत; दिल्ली हाईकोर्ट ने युवती के हक में दिया फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अविवाहित बालिग बेटी भी अपने पिता से भरण-पोषण राशि की मांग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में शर्त सिर्फ इतनी रहती है कि यह अविवाहित बेटी खुद से कमाने के योग्य नहीं होनी चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अविवाहित बालिग बेटी भी अपने पिता से भरण-पोषण राशि की मांग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत सिर्फ पति-पत्नी, माता-पिता या नाबालिग बच्चों को ही गुजाराभत्ता मांगने का अधिकार नहीं है, बल्कि बालिग अविवाहित बेटी अपनी मां के साथ भी इस कानून के तहत संयुक्त रूप से याचिका दायर कर पिता से गुजर-बसर की मांग कर सकती है।
जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने कहा कि इस तरह के मामलों में शर्त सिर्फ इतनी रहती है कि यह अविवाहित बेटी खुद से कमाने के योग्य नहीं होनी चाहिए। साथ ही कोई संपत्ति (जिससे वह अपना गुजारा चला सके) नहीं होनी चाहिए। बेंच ने इस टिप्पणी के साथ ही एक पिता की याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता पिता का कहना था कि उसकी बेटी बालिग है। उसे पिता से गुजाराभत्ता मांगने का कोई अधिकार नहीं है। अपने जीवन-यापन के लिए वह काम कर सकती है।
फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
बालिग अविवाहित बेटी ने मां के साथ एक संयुक्त गुजारा भत्ता याचिका फैमिली कोर्ट में दायर की थी। कोर्ट ने इस याचिका को मंजूर करते हुए पिता को आदेश दिया था कि वह अपनी पत्नी व बालिग अविवाहित बेटी को प्रत्येक माह 45 हजार रुपये गुजाराभत्ता देगा। इस आदेश को पिता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। पिता का कहना था कि पत्नी के लिए वह गुजाराभत्ता दे सकता है, लेकिन बेटी इसकी हकदार नहीं है।





