काम की बात: एजेंट की गलती का खामियाजा ग्राहक नहीं भुगतेगा, उपभोक्ता आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को दिया झटका
दिल्ली में एक उपभोक्ता आयोग ने हेल्थ पॉलिसी लेने वाले बीमाधारक के हक में फैसला सुनाते हुए इंश्योरेंस कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया और पीड़ित को ब्याज सहित 20 लाख रुपये चुकाने का आदेश दिया है।

निखिल पाठक, नई दिल्ली
बीमा एजेंट के जरिये ली गई हेल्थ पॉलिसी में जानकारी छिपाने का बहाना बनाकर क्लेम खारिज करना स्टार हेल्थ एवं एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। पश्चिमी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 24 अगस्त को इंश्योरेंस कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाया है।
आयोग की अध्यक्ष सोनिका महरोत्रा, सदस्य ऋचा जिंदल और अनिल कुमार कौशल की बेंच ने स्पष्ट कहा है कि बीमा एजेंट की ओर से की गई किसी भी प्रकार की लापरवाही, धोखाधड़ी या गलती का खामियाजा ग्राहक नहीं भुगतेगा। यदि ग्राहक ने एजेंट को पुरानी बीमारी से जुड़े सही तथ्य और कागजात सौंप दिए थे, तो फॉर्म में जानकारी दर्ज नहीं करने के लिए सीधे तौर पर बीमा कंपनी ही जिम्मेदार मानी जाएगी।
आयोग ने कंपनी को उपभोक्ता को 20 लाख रुपये छह फीसदी सालाना ब्याज के साथ चुकाने का आदेश दिया। साथ ही कानूनी खर्च के 35 हजार रुपये अलग से देने होंगे।
क्या है मामला
यह मामला सुभाष नगर निवासी वरिंदर कुमार भसीन की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष में इंश्योरेंस कंपनी के अधिकृत एजेंट गौरव मलिक के जरिए 10 लाख रुपये (नो-क्लेम बोनस मिलाकर 20 लाख रुपये) की ‘स्टार कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस’ पॉलिसी ली थी। पॉलिसी लेते वक्त भसीन ने एजेंट को स्पष्ट बताया था कि उनकी पत्नी सीमा भसीन का वर्ष 2014 में कैंसर का ऑपरेशन हो चुका है और वे खुद भी शुगर के मरीज हैं। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट्स भी एजेंट को सौंपीं, लेकिन एजेंट ने दफ्तर में जाकर ब्योरा भरने का झांसा देकर सादे फॉर्म पर हस्ताक्षर करा लिए। जब पॉलिसी की कॉपी घर पहुंची तो उसमें पुरानी बीमारी के कॉलम में ‘नो-पीईडी (कोई पुरानी बीमारी नहीं)’ दर्ज था। भसीन ने सतर्कता दिखाते हुए अगस्त 2018 में एजेंट को ई-मेल और वॉट्सऐप के जरिये पत्नी की पुरानी कैंसर रिपोर्ट भेजी और रिकॉर्ड में सुधार करने को कहा था। उसके बाद भी एजेंट ने कहा कि कागजात सिस्टम में अपडेट कर दिए हैं।
बीमा दावा खारिज करना पड़ा महंगा
मई 2021 में भसीन की पत्नी सीमा को दोबारा कैंसर हुआ और 31 मई को मुंबई के एक अस्पताल में उनका ऑपरेशन हुआ। इलाज के दौरान 4 सितंबर 2021 को उनका निधन हो गया। पति ने इलाज पर खर्च हुए करीब 58.37 लाख रुपये में से 20 लाख रुपये के बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। कंपनी ने 5 अक्टूबर 2021 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि पॉलिसी लेते समय कैंसर की जानकारी छिपाई गई थी। इसके बाद पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।


