दिल्ली में सिलेंडर की लाइन में लगी भीड़, आ रहीं कई समस्याएं; सरकार कह रही- गैस की कोई कमी नहीं
राजधानी दिल्ली में गैस सिलेंडर लेने के लिए आम आदमी लाइनों में खड़ा है। उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इसके उलट दिल्ली सरकार लगातार कह रही है कि राजधानी में एलपीजी, पीएनजी, डीजल और पेट्रोल की आपूर्ती सामान्य है।

खाड़ी देशों में चल रही जंग की आंच भारत की रसोई तक पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में गैस सिलेंडर लेने के लिए आम आदमी लाइनों में खड़ा है। उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इसके उलट दिल्ली सरकार लगातार कह रही है कि राजधानी में एलपीजी, पीएनजी, डीजल और पेट्रोल की आपूर्ती सामान्य है।
बुकिंग प्रक्रिया में बदलाव से पैदा हुई समस्या
गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होने और बुकिंग प्रक्रिया में बदलाव के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले जहां पंजीकृत मोबाइल नंबर से कॉल करते ही आसानी से सिलेंडर बुक हो जाता था, वहीं अब कई बार कॉल करने पर नंबर अमान्य बताया जा रहा है।
ऐप से भी बुक नहीं हो रहा सिलेंडर
छतरपुर निवासी एके शर्मा ने बताया कि वो पिछले दो दिन से गैस सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक सफलता हाथ नहीं लग सकी है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने एजेंसी के बुकिंग नंबर पर कई बार कॉल की। हर बार सिर्फ कॉल कट गई, पहले की तरह बुकिंग हो जाने संबंधी मैसेज नहीं आया। इसके बाद उन्होंने गैस प्रदाता कंपनी की मोबाइल ऐप के माध्यम से भी सिलेंडर बुक करने का प्रयास किया, लेकिन तकनीकी दिक्कत बताकर बुकिंग नहीं हुई।
बुकिंग बढ़ी, आपूर्ती घटी- डीलर भी परेशान
कई उपभोक्ताओं को लंबी प्रक्रिया से गुजरते हुए अलग-अलग विकल्प चुनने के लिए कहा जा रहा है, जिससे बुकिंग में समय लग रहा है और लोगों की चिंता बढ़ गई है। शाहदरा के एक एलपीजी गैस डीलर ने बताया कि होली से पहले आमतौर पर रोजाना 400 से 500 सिलेंडर की बुकिंग होती थी और रोज इतने ही सिलेंडर सप्लाई किए जाते थे, लेकिन अब प्रतिदिन होने वाली बुकिंग करीब 800 तक पहुंच गई है। इसकी तुलना में आपूर्ति 20 फीसदी कम हो गई है।
बंद होने की कगार पर पहुंचा ढाबा
कनॉट प्लेस स्थित सिंधिया हाउस के पास एक तंग गली में स्थित ढाबा अब बंद होने की कगार पर है। यह ढाबा ऑफिस कर्मचारियों, टैक्सी ड्राइवरों और दूसरे रोजगार से जुड़े लोगों के लिए सस्ता और स्वादिष्ट भोजन का प्रमुख ठिकाना है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रुकने से मालिक की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी नहीं मिल रहा सिलेंडर
स्थानीय निवासी अमित तेवतिया ने बताया कि उनके छोटे भाई संजय की एक हफ्ते बाद शादी है। एक माह पहले ही अपने जानकारों और पड़ोसियों को सिलेंडर देने के लिए कह दिया था। लेकिन जब सिलेंडर देने का समय आया तो यह संकट आ गया। सिलेंडर बुकिंग होने के बाद भी चार पांच दिन सिलेंडर मिलने में लगने से थोड़ी परेशानी बढ़ गई है।
सरकार बोली- गैस की कोई कमी नहीं है
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय राजधानी में एलपीजी., पेट्रोल, डीजल और पीएनजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि गैस आपूर्ति को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक घबराहट या भंडारण से बचें।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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