दिल्ली दंगा मामले में ताहिर हुसैन के भाई समेत 9 आरोपी बरी, अदालत ने बताई फैसले की खास वजह

एएनआई, नई दिल्ली
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कोर्ट ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष का पूरा मामला मुख्य रूप से तीन गवाहों नरेश, कांस्टेबल ज्ञान और हेड कांस्टेबल सुनील की गवाही पर टिका हुआ है। ऐसे में आरोपियों को बरी करते हुए जज ने घटनाओं की तारीखों और गवाहों के बयानों में विसंगतियों की ओर इशारा किया।

दिल्ली दंगा मामले में कोर्ट ने ताहिर हुसैन के भाई समेत 9 आरोपियों को किया बरी, दिया 'संदेह का लाभ' (AI से निर्मित प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के भाई शाह आलम समेत 9 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 'संदेह का लाभ' देते हुए दंगा, चोट पहुंचाने और अन्य अपराधों के आरोपों से मुक्त कर दिया। इस दौरान अदालत ने शाह आलम, राशिद सैफी, मोहम्मद शादाब, हबीब, इरफान, सुहैल, सलीम उर्फ आशू, इरशाद और अजहर उर्फ सोनू को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह मामला साल 2020 में दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ा हुआ था। इस FIR में कई शिकायतें शामिल थीं।

एडिशनल सेशंस जज (ASJ) परवीन सिंह की अदालत ने 30 मार्च को सुनाए अपने फैसले में अभियोजन पक्ष के गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा- 'मेरा मानना ​​है कि आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए इन गवाहों की गवाही पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं होगा। इसलिए, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि आरोपी 'संदेह का लाभ' पाने के हकदार हैं। नतीजतन, सभी आरोपियों को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी किया जाता है।'

कोर्ट बोला- पूरा मामला तीन गवाहों की गवाही पर टिका

कोर्ट ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष का पूरा मामला मुख्य रूप से तीन गवाहों नरेश, कांस्टेबल ज्ञान और हेड कांस्टेबल सुनील की गवाही पर टिका हुआ है। ऐसे में आरोपियों को बरी करते हुए जज ने घटनाओं की तारीखों और गवाहों के बयानों में विसंगतियों की ओर इशारा किया।

अदालत ने पाया गवाहों ने दी झूठी गवाही

जज ने कहा, 'उनकी गवाहियां सामान्य प्रकृति की हैं, उनमें कोई खास बात भी नहीं है' साथ ही उन्होंने विशेष रूप से उस बात का उल्लेख भी किया कि 'इन गवाहों ने इनोवा क्रिस्टा कार से जुड़ी घटना की जगह और रॉयल मोटर्स वाली घटना की तारीख और उस घटना को खुद अपनी आंखों से देखने के संबंध में झूठी गवाही दी है।'

चांदबाग क्षेत्र में हुआ था युवक पर हमला

यह मामला साल 2020 में दयालपुर थाने में दर्ज एक FIR से संबंधित है। इसमें दंगों के दौरान कई अलग-अलग घटनाओं को जोड़ा गया था। इस FIR को विवेक पाठक नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया था। उसने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2020 को हुए दंगों के दौरान, वह इनोवा क्रिस्टा गाड़ी से गाजियाबाद से फरीदाबाद जा रहा था। जब वह चांद बाग पहुंचा, तो सैकड़ों लोगों ने उसे घेर लिया और उसकी गाड़ी में तोड़फोड़ की।

दो अन्य FIR को भी विवेक की FIR से जोड़ा गया

इस घटना में उसे, पवन तिवारी और अन्य लोगों को चोटें आईं थीं। इस मामले की जांच के दौरान, दो और शिकायतें एक SI मुमताज अली की और दूसरी सलीम अहमद की FIR भी इसके साथ जोड़ दी गईं। SI मुमताज अली की शिकायत के अनुसार, 24 फरवरी को उन्होंने अपनी बाइक चांद बाग में विरोध-स्थल के पास खड़ी की थी, और दंगों के दौरान यह मोटरसाइकिल जला दी गई।

उधर सलीम अहमद की शिकायत के अनुसार, चांद बाग में 'रॉयल ​​मोटर्स' नाम से उनकी एक दुकान थी, और 24 फरवरी को लगभग 3 बजे दोपहर में, दंगाइयों ने उनकी पूरी दुकान और उसमें रखा सारा सामान जला दिया। इसके अलावा, जांच के दौरान, राधा रानी, ​​रज्जो (रज्जो की शिकायत रिकॉर्ड पर साबित नहीं हुई है) और मोहम्मद इशराक की तीन और शिकायतें भी इस FIR के साथ जोड़ दी गई थीं।

अदालत ने पाया कि पुलिस द्वारा पेश किए गए गवाहों ने 'रॉयल मोटर्स' की घटना और इनोवा कार की घटना के स्थान और समय को लेकर गलत या भ्रामक बयान दिए। जिसके बाद सबूतों के अभाव और बयानों में स्पष्टता न होने के कारण अदालत ने आरोपियों को निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।

Sourabh Jain

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सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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