एक किलो सोना, 17 किलो चांदी और 10 लाख रुपए, दिल्ली में दंपति को बंधक बनाकर लूटपाट

हिन्दुस्तान, हेमंत कुमार पांडेय/नई दिल्ली
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राजधानी दिल्ली में बेखौफ बदमाशों ने एक बड़ी लूटपाट की घटना को अंजाम दिया। बदमाशों ने दंपति को बंधक बनाकर करोड़ों के सामान लूट लिए। पुलिस इस वारदात के पीछे किसी जानकार के हाथ होने की संभावना जता रही है। पीड़ित का कश्मीरी गेट में आटो पार्ट्स का कारोबार है।

Delhi Police
दिल्ली पुलिस के जवान।

दिल्ली के रूप नगर इलाके में गुरुवार देर रात हथियारबंद बदमाशों ने कोठी में बुजुर्ग दंपति को बंधक बनाकर मारपीट की। इसके बाद एक किलो सोने के आभूषण, 17 किलो चांदी और दस लाख नगद लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

74 साल के तारेश बैसीवाला अपनी पत्नी अर्चना के साथ रूप नगर स्थित कोठी में रहते हैं। बुजुर्ग का कश्मीरी गेट में आटो पार्ट्स का कारोबार है। दंपति की एकमात्र बेटी की शादी दिल्ली में रहने वाले सीए से हुई है। पीड़ित ने बताया कि वह हफ्ते में तीन दिन अपने ऑफिस जाते हैं और अन्य दिन घर से काम करते हैं। पीड़ित बुजुर्ग ने शिकायत में बताया कि वह गुरुवार रात करीब सवा दो बजे बाथरूम जाने के लिए उठे। चूंकि टंकी में पानी नहीं था इसलिए वह बाहर के कांच का गेट खोल कर मोटर चलाने गए। इसी दौरान बाहर चार बदमाश पिस्टल और रॉड लेकर घर में घुस गए। पीड़ित ने बताया कि बदमाशों ने पिस्टल तानकर बुजुर्ग दंपति को पीटा।

बदमाशों ने पहले मांगी लाइसेंसी पिस्टल

बदमाशों ने घर में घुसते ही बुजुर्ग से उनकी लाइसेंसी पिस्टल का ठिकाना पूछा। हालांकि बुजुर्ग ने बदमाशों को झूठ बोल दिया। फिर बदमाश उस कमरे में गये जहां तिजोरी रखी थी। दरअसल, बुजुर्ग दंपति ने दीवार में तिजोरी लगाने के बाद उसे छिपाने के लिए उसपर प्लाईवुड लगा दिया था। बदमाशों ने सीधे प्लाईवुड हटाया और दंपति से चाबी मांगी। फिर करीब आधे घंटे तक बदमाशों ने घर में लूटपाट की। बदमाश दस लाख नगद, एक किलो सोने के आभूषण एवं सिक्के, सात किलो की तीन चांदी की मूर्ति और दस किलो चांदी के सिक्के लूट ले गए। इसके बाद घायल बुजुर्ग दंपति को धमकाकर भाग गए। करीब एक घंटे बाद बुजुर्ग दंपति ने पुलिस को घटना की सूचना दी। इसके बाद घायलों का बाड़ा हिंदूराव मेडिकल कॉलेज में इलाज कराया गया। पुलिस ने पीड़ित के बयान पर एफआईआर दर्ज कर ली है।

बाइक से आए थे बदमाश

पुलिस की जांच में सामने आया है कि दो सफेद रंग की बाइक पर चार बदमाश आए थे। बदमाशों में से दो ने वारदात करने के दौरान भी हेलमेट लगाया हुआ था। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी रानी झांसी फ्लाईओवर के नीचे से आनंद पर्वत की तरफ निकल गए। वहीं पुलिस की एक टीम बदमाशों के घटनास्थल पर आने के रूट को खंगाल रही है।

जानकार का हाथ संभव

अभी तक की जांच में पुलिस इस वारदात के पीछे किसी जानकार के हाथ होने की संभावना जता रही है। बुजुर्ग दंपति के घर पर दो नौकरानी दीपा और मंजू काम करती हैं। इसके अलावा एक माली लालू काम करने आता है। ये सभी रात तक चले जाते हैं। पुलिस इन सभी के मोबाइल के सीडीआर आदि खंगाल रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि बदमाश जिस तरह से घर में घुसे और तलाशी शुरू की उससे लगता है कि उन्हें अंदर की सूचना थी।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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