गाजियाबाद पुलिस का बड़ा ऐक्शन, कफ सिरप तस्करी में आरोपियों की साढ़े 12 करोड़ की संपत्ति फ्रीज
गाजियाबाद पुलिस ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी मामले बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह के दो मुख्य आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर खरीदी गई साढ़े 12 करोड़ की संपत्ति रविवार को फ्रीज कर दी।

गाजियाबाद पुलिस ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी मामले बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय गिरोह के दो मुख्य आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर खरीदी गई साढ़े 12 करोड़ की संपत्ति रविवार को फ्रीज कर दी। अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई एनडीपीएस ऐक्ट के तहत की गई। पूर्व में एक आरोपी की दो करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।
3.40 करोड़ की प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद की थी
डीसीपी नगर एवं मुख्यालय धवल जायसवाल ने बताया कि तीन नवंबर 2025 को क्राइम ब्रांच की टीम ने सोनभद्र पुलिस के साथ कार्रवाई करते हुए मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम परिसर में बरेली-गोरखपुर ट्रांसपोर्ट के गोदाम पर छापा मारा था। यहां चार ट्रकों में चूने के कट्टों के बीच छिपाकर रखी गई 3.40 करोड़ की प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद की थी। इस दौरान पुलिस ने ट्रांसपोर्टर संतोष भड़ाना समेत सौरभ त्यागी, शादाब, शिवकांत उर्फ शिव, अंबुज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, दीपू यादव और सुशील यादव को गिरफ्तार किया था।
देश के विभिन्न राज्यों में भिजवाता था
पूछताछ और जांच में सामने आया कि इंदिरापुरम थानाक्षेत्र के गांव मकनपुर निवासी सौरभ त्यागी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पूरे नेटवर्क की कमान संभाल रहा था। वह प्रतिबंधित कफ सिरप को अलग-अलग स्थानों से इकट्ठा कर ट्रांसपोर्ट के जरिए देश के विभिन्न राज्यों में भिजवाता था। जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ था और बांग्लादेश तक कफ सिरप की तस्करी की जा रही थी।
कई जगह जमीन, मकान और संपत्तियां खरीदी थीं
डीसीपी ने बताया कि सहारनपुर के शास्त्री नगर निवासी विभोर राणा और विशाल सिंह लंबे समय से अपने साथियों के साथ मिलकर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे। इस अवैध कारोबार से अर्जित धन से आरोपियों ने कई जगह जमीन, मकान और अन्य संपत्तियां खरीदी थीं, जिन्हें पुलिस ने रविवार को फ्रीज कर दिया है।
आय से अधिक संपत्ति का खुलासा
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की आर्थिक स्थिति और आय के स्रोतों की भी जांच की। जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2025-26 के बीच विभोर राणा और उसकी पत्नी विशाखा, विशाल सिंह व उसकी पत्नी निशा रानी और परिवार के अन्य सदस्यों की घोषित कुल आय करीब नौ करोड़ रुपये थी, लेकिन इसी अवधि में इन लोगों ने 22.67 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति खरीद ली। इससे स्पष्ट हुआ कि करीब 13.58 करोड़ रुपये की संपत्ति अवैध तस्करी से अर्जित धन से खरीदी गई है। इसी आधार पर पुलिस ने 12.55 करोड़ रुपये की संपत्तियों को फ्रीज करने की कार्रवाई की है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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