भ्रष्टाचार कैंसर जैसी बीमारी, कीमोथेरेपी जैसी सजा जरूरी.. दिल्ली की अदालत की सख्त टिप्पणी
दिल्ली की अदालत ने सफदरजंग कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में एक रिटायर्ड IAS समेत 13 लोगों को 2 से 5 साल की जेल की सजा सुनाई है, जिसमें जज ने भ्रष्टाचार को समाज का 'कैंसर' बताकर कठोर इलाज की जरूरत पर जोर दिया।

दिल्ली की एक अदालत ने करोड़ों रुपये के कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी (CGHS) घोटाले में 13 लोगों को जेल की सजा सुनाई है। इनमें एक रिटायर्ड IAS अफसर भी शामिल है। जज ने भ्रष्टाचार को समाज का 'कैंसर' बताया और कहा कि इसे ठीक करने के लिए 'कीमोथेरेपी' जैसा कठोर इलाज चाहिए। जज ने चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार को लोहे के हाथों से कुचलना होगा।
हजारों सपनों पर पानी फेरा
यह घोटाला सफदरजंग कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी से जुड़ा है। दोषियों ने मृत पड़ी सोसाइटियों को जिंदा दिखाने के लिए जाली दस्तावेज बनाए और दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) से जमीन हथिया ली। फिर फ्लैट्स को नए मेंबर्स या एजेंट्स को मनमाने दामों पर बेच दिया। इसकी वजह से हजारों घर खरीदने वाले लोग बेघर हो गए, लेकिन EMI की मार झेलते रहे। CBI के मुताबिक, 135 से ज्यादा फर्जी सोसाइटियां बनाकर लोगों को चूना लगाया गया।
कौन-कौन फंसे जाल में?
13 अक्टूबर को दोषी ठहराए गए इन शातिरों को 31 अक्टूबर को सजा सुनाई गई। इसमें कर्मवीर सिंह, नरेंद्र कुमार, महा नैन शर्मा, पंकज मदान, अहवनी शर्मा, आशुतोष पंत, सुदर्शन टंडन, मनोज वत्स, विजय ठाकर, विकास मदान और पूनम अवस्थी शामिल हैं। सबको 5 साल की जेल और जुर्माना शामिल है। इसके अलावा 84 साल के रिटायर्ड IAS गोपाल दीक्षित और 92 साल के नरेंद्र धीर को 2 साल की सजा और जुर्माना सुनाया गया। CBI ने IPC की धाराओं के अलावा भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केस दर्ज किया था, जिसमें साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगे।
अदालत की दो टूक
स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने कहा, 'भ्रष्टाचार लोकतंत्र और सामाजिक व्यवस्था का बैरी है। यह अर्थव्यवस्था को खोखला करता है और सांस्कृतिक विरासत को नष्ट। अगर शुरू में ही नहीं रोका तो समाज में उथल-पुथल मच जाएगी।' जज ने साफ किया कि आम आदमी का न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगाना नहीं चाहिए, इसलिए हल्की सजा नहीं चलेगी।
दोषियों ने अदालत में परिवार की जिम्मेदारी का हवाला देकर रहम मांगा, लेकिन जज ने फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा, "अगर परिवार इतना ही प्यारा था, तो अपराध क्यों किया?" कोर्ट ने कहा कि इनका मकसद दिल्ली में सस्ती प्रॉपर्टी हड़पना था, चाहे जालसाजी से ही क्यों न हो।


