
'युवराज की मौत दुर्घटना नहीं मर्डर है', कांग्रेस ने यूपी की भाजपा सरकार पर हमला बोला; पूछे सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नोएडा में एक युवा इंजीनियर की कार पानी से भरे एक बड़े गड्ढे में गिर गई और मौके पर पहुंची उत्तर प्रदेश पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम तमाशा देखती रही। युवक को पानी से बाहर नहीं निकाले जाने के कारण उसकी जान चली गई।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नोएडा में एक युवा इंजीनियर की कार पानी से भरे एक बड़े गड्ढे में गिर गई और मौके पर पहुंची उत्तर प्रदेश पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम तमाशा देखती रही। युवक को पानी से बाहर नहीं निकाले जाने के कारण उसकी जान चली गई।
कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पेज एक्स पर सोमवार को एक पोस्ट में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार से सवाल किया कि आखिर उसके शासन की यह कैसी व्यवस्था है कि बचाव दल मौके पर पहुंचता है, लेकिन उसके पास कोई उपकरण नहीं होते कि युवक को पानी से बाहर निकाला जा सके।
…तो उसकी जान बचाई जा सकती थी
कांग्रेस ने कहा कि यदि युवराज को समय पर पानी से बाहर निकाल लिया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी, लेकिन भाजपा की हत्यारी व्यवस्था ने 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की जान ले ली। उसकी कार नोएडा के पॉश इलाके में पानी से भरे एक बड़े गड्ढे में गिरी थी। यह गड्ढा एक बिल्डर ने खुदवाया था, जिसमें बारिश का पानी भर गया था।
किसी ने उसकी मदद नहीं की
पार्टी ने आरोप लगाया कि गड्ढे में गिरे युवराज ने हिम्मत जुटाई और किसी तरह गाड़ी की छत पर पहुंच गया। फिर उसने अपने पिता को कॉल किया। पिता ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम पहुंची, लेकिन पानी ठंडा होने के कारण किसी ने उसकी मदद नहीं की। दो घंटे तक युवराज मदद के लिए चीखता रहा, चिल्लाता रहा...लेकिन उप्र पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम वहां खड़ी तमाशा देखती रही। आखिर में एक-एक सांस के लिए लड़ते हुए युवराज ने दम तोड़ दिया। युवराज की मौत, दुर्घटना नहीं मर्डर है।
भाजपा के सड़े-गले सिस्टम का नतीजा
कांग्रेस ने इसे हत्या करार देते हुए कहा कि यह हत्या भाजपा सरकार की व्यवस्था के कारण हुई है। उसका कहना है कि भाजपा के सड़े-गले सिस्टम ने युवराज की हत्या की है। सवाल है कि क्या फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ के पास ऐसे उपकरण ही नहीं थे, जिससे युवराज को पानी से निकाला जा सकता था।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।




