कमर्शियल वाहन ड्रग तस्करी में पकड़े तो रद्द होगा परमिट, नशे के सौदागरों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की नया प्लान

Apr 05, 2026 09:37 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, रमेश त्रिपाठी
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Delhi News : दिल्ली पुलिस ने अब नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाले व्यावसायिक वाहनों के परमिट रद्द कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए उठाए जा रहे कदमों में यह अब तक की कड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

कमर्शियल वाहन ड्रग तस्करी में पकड़े तो रद्द होगा परमिट, नशे के सौदागरों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की नया प्लान

Delhi News : दिल्ली पुलिस ने अब नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाले व्यावसायिक वाहनों के परमिट रद्द कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। नशीले पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए उठाए जा रहे कदमों में यह अब तक की कड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

पुलिस की नई रणनीति के तहत अब तक 40 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स यूनिट, दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग से परमिट रद्द करने की सिफारिश करती है। यह नियम न केवल दिल्ली के वाहनों पर बल्कि बाहरी राज्यों से दिल्ली में प्रवेश करने वाले उन व्यावसायिक वाहनों पर भी लागू होता है, जो तस्करी में लिप्त पाए जाते हैं।

यह है प्रक्रिया

इस कार्रवाई के तहत यदि कोई कमर्शियल वाहन (ट्रक, बस, टैक्सी या डिलीवरी वैन) ड्रग तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ ) परिवहन विभाग को उस वाहन का परमिट रद्द या सस्पेंड करने की सिफारिश भेजती है। इसके बाद पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर परिवहन विभाग मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करता है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर परमिट रद्द कर दिया जाता है। इतना ही नहीं यदि वाहन मालिक यह साबित नहीं कर पाता कि वाहन का उपयोग उसकी जानकारी या मिलीभगत के बिना हुआ है, तो वाहन जब्त भी हो सकता है।

क्यों परमिट रद्द करा रही है पुलिस

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का परमिट रद्द करना उनकी उस प्रमुख रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिये नशे के सौदागरों के नेटवर्क को तोड़ा जा सके।

इसका उद्देश्य अवैध ड्रग नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। पुलिस तस्करी में पकड़े गए वाहनों की जानकारी परिवहन विभाग से साझा करती है, ताकि उनके कमर्शियल परमिट को निरस्त किया जा सके। यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा और नशीली दवाओं के प्रसार को रोकने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

एक साल तक की जेल तय

दिल्ली में नशे की तस्करी को रोकने के लिए पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत ड्रग तस्करों को एक साल तक जेल से बाहर भी नहीं निकलने दिया जा रहा है। 'पिट एनडीपीएस' लगते ही किसी भी तस्कर को कम से कम एक साल तक जेल में रहना अनिवार्य है।

आर्थिक चोट भी दे रही पुलिस

पुलिस 'पिट एनडीपीएस' के तहत तस्करों को आर्थिक चोट भी पहुंचा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बीते करीब दो वर्षों में 84 ड्रग डीलरों की 31 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। तस्कर के जेल में होने और संपत्ति जब्त किए जाने से तस्करी का नेटवर्क टूट रहा है।

इन स्थितियों में होती है कार्रवाई

● वाहन में व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थ मिलना

● वाहन का उपयोग बार-बार तस्करी की गतिविधियों के लिए होना

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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