जंतर-मंतर पर कॉकरोच के मुखौटे में हल्लाबोल; CJP समर्थकों की क्या 5 बड़ी मांगें?
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के साथ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में बड़ी संख्या में CJP समर्थकों ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समर्थक परीक्षा गड़बड़ियों, NEET पेपर लीक और CBSE मार्किंग सिस्टम में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई अन्य मांगें भी उठाई। इस रिपोर्ट में जानें कॉकरोच जनता पार्टी और उसके समर्थकों की क्या हैं 5 बड़ी मांगे?
1- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
2- शिक्षा में सही ट्रेनिंग के बाद डिजिटलाइजेशन
3- कॉम्पिटिटिव एग्जाम में निष्पक्षता और विश्वसनीयता
4- छात्रों की मानसिक सेहत पर ध्यान
5- जवाबदेही की मांग
6- मणिपुर में एजुकेशन सेक्टर को पटरी पर लौटाएं
हमारी पोस्ट डिलीट कर दोगे, मिटा नहीं सकते
पीटीआई के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई लंबी है। हमें सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एक महीना हो गया है लेकिन ये लोग इतने बेशर्म हैं कि कार्रवाई करने के बजाय… हमारे अकाउंट हैक करा कर और हमारी पोस्ट डिलीट कराने जैसे काम के जरिये ध्यान भटकाने में लगे हैं। आप हमारी पोस्ट डिलीट कर सकते हैं लेकिन हमें मिटा नहीं सकते हैं।
1- धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें
पीटीआई के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पहुंचने के बाद चलते हुए संवाददाताओं से कहा कि शिक्षा मंत्री को फौरन इस्तीफा देना चाहिए। 5 छात्रों ने जान दे दी है। हमें धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए एक महीना हो गया है। विरोध प्रदर्शन में ज्यादातर युवा थे। इनमें से कई ने कॉकरोच के मास्क पहन रखा था। महिलाएं भी कॉकरोच के मास्क में नजर आईं। कई स्कूली छात्र अपने माता-पिता के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
2- सही ट्रेनिंग के बाद ही शिक्षा में डिजिटलाइजेशन
समर्थकों में शामिल दिल्ली में हायर एजुकेशन कर रहे 3 छात्रों के पिता राधेश्याम कैथल (50) ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि सरकार बैंकिंग से लेकर शिक्षा तक सब कुछ डिजिटल कर रही है। फिर भी क्या हम गलत तरीकों को रोक पा रहे हैं? हम देख रहे हैं कि बैंक फ्रॉड बढ़ गए हैं। अब हम शिक्षा के क्षेत्र में भी डिजिटलाइजेशन का असर भी देखा जा रहा है। मैं डिजिटाइजेशन के खिलाफ नहीं हूं लेकिन इसको शिक्षकों की सही ट्रेनिंग के बाद ही लागू किया जाए तो बेहतर होगा।
3- प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता
राजस्थान के जयपुर की रहने वाली और अभी दिल्ली में रह रहीं 34 साल की गायत्री सिंह ने कहा कि मेरा चचेरा भाई कोटा में NEET की तैयारी कर रहा था। उसे उम्मीद थी कि यदि उसे कम रैंकिंग वाले कॉलेज में भी एडमिशन मिल गया तो वह ले लेगा लेकिन पेपर ही लीक हो गया। वह तीन साल से अधिक समय से तैयारी कर रहा है। वह इस घटना से मायूस है। हमें समझ नहीं आ रहा है कि उसे दोबारा परीक्षा देने के लिए कैसे प्रेरित करें। परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
4- मणिपुर में एजुकेशन सेक्टर को पटरी पर लौटाएं
समर्थकों ने मणिपुर में जारी अशांति को खत्म करने और शिक्षा सेक्टर को सुचार बनाने को लेकर भी अपनी आवाजें बुलंद कीं। 32 साल के विंसन ने कहा कि बीते 3 वर्षों से मणिपुर में अशांति है। मेरे राज्य मणिपुर में स्कूल और कॉलेज समेत कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है। मणिपुर का एजुकेशन सेक्टर बेपटरी हो चुका है। इससे छात्र बहुत तनाव में हैं। हमारे राज्य में शिक्षा को सुचारू किया जाना चाहिए। विंसन अशांति के कारण दो साल पहले मणिपुर छोड़कर नोएडा में काम कर रहे हैं।
5- छात्रों और अभिभावकों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान
दिल्ली के 18 साल के रौनक कुमार ने कहा कि मैं ऑनलाइन कॉकरोच जनता पार्टी को फॉलो कर रहा था लेकिन विरोध प्रदर्शन में आने का मन नहीं बना पाया था। मैं सुबह 10 बजे रोहिणी में अपने ऑफिस जा रहा था लेकिन मूड बदला कि प्रदर्शन देख ही लूं। मुझे कॉकरोच जनता पार्टी के भविष्य के बारे में नहीं पता लेकिन वे उन मुद्दों पर बात कर रहे हैं जिनका समाधान जरूरी है। छात्र हों या अभिभावक सभी पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं।
6- जवाबदेही और छात्रों की मानसिक स्थिति पर दें ध्यान
पेपर लीक जैसी घटनाओं पर जवाबदेही सुनश्चित की जानी चाहिए। पेशे से मनोवैज्ञानिक 38 साल की सुगंधा ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी अपने आंदोलन से लोगों को सड़क पर उतारने में कामयाब रही है। वे ऐसे मुद्दों पर बात कर रहे हैं जिनसे लोगों का जुड़ाव है। कुछ छात्रों ने तो जान तक दे दी है। आलम यह है कि लाखों छात्र डिप्रेशन में हैं। इसकी कोई जवाबदेही नहीं है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
संक्षिप्त विवरण
कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
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