हिंडन को निर्मल करने की तैयारी, नमामि गंगे मिशन के तहत नालों के 'जहर' पर लगेगी लगाम

Feb 15, 2026 09:58 am ISTKrishna Bihari Singh हिन्दुस्तान, ट्रांस हिंडन
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हिंडन नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए 630 करोड़ रुपये की योजना तैयार है। जल निगम नौ जहरीले नालों को टैप कर गंदे पानी को एसटीपी में साफ करेगा। इसके लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। 

हिंडन को निर्मल करने की तैयारी, नमामि गंगे मिशन के तहत नालों के 'जहर' पर लगेगी लगाम

हिंडन को प्रदूषणमुक्त करने की तैयारी तेज हो गई। जल निगम ने डीपीआर तैयार कर मुख्यालय को भेज दी। 630 करोड़ रुपये की इस परियोजना को हरी झंडी मिलते ही केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी। इसे स्वीकृति मिलने के बाद योजना की टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मौजूदा वक्त में आलम यह है कि औद्योगिक इकाइयों और घरों से निकलने वाला गंदा पानी सालों से हिंडन में गिर रहा है। इससे यह पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है।

नौ नालों की पहचान

एनजीटी के आदेश पर शासन ने नमामि गंगे मिशन के तहत हिंडन को निर्मल करने के लिए जल निगम को प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया था। जल निगम ने नगर निगम क्षेत्र के नौ नालों को चिह्नित किया है, जिनसे जहरीला पानी हिंडन में गिर रहा है। जल निगम ने इसकी डीपीआर तैयार कर ली है।

सभी नाले किए जाएंगे टैप

इसके तहत हिंडन में गंदा पानी गिराने वाले सभी नाले टैप किए जाएंगे। पाइपलाइन से गंदा पानी एसटीपी पर लाया जाएगा और यहां शोधित करने के बाद इस पानी को हिंडन में छोड़ा जाएगा। डीपीआर जल निगम ने लखनऊ स्थित मुख्यालय भेजी है। इसी महीने तक हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।

बायोडायवर्सिटी पार्क के पास एसटीपी बनेगा

डीपीआर में सात नालों की टैपिंग शामिल है, क्योंकि करेहड़ा के पास हिंडन में गिर रहे दो नालों को 331 करोड़ रुपये की सीवर योजना के तहत ही टैप कर लिया जाएगा। 140 एमएलडी का एसटीपी बनाने के लिए बायोडायवर्सिटी पार्क के पास 40 हजार वर्गमीटर जमीन चिह्नित कर ली गई है। नगर निगम से मिली जमीन का जल निगम ने सत्यापन भी कर लिया है। जमीन को लेकर कोई विवाद भी नहीं है। ऐसे में योजना का कार्य केंद्र से स्वीकृति मिलते ही शुरू कर दिया जाएगा।

जलीय जीवों को मिलेगा जीवन

जल निगम के सर्वे के मुताबिक इस नदी में जलीय जीवन पूरी तरह से समाप्त है। इस कारण आसपास के क्षेत्रों में भूजल भी दूषित हो रहा है। परियोजना के पूरा होने के बाद जलीय जीवों को भी जीवन मिलेगा।

मुख्यालय भेजी गई डीपीआर

जल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण प्रताप सिंह ने कहा कि डीपीआर मुख्यालय भेजी है। मंजूरी मिलते ही इसे केंद्र को भेजा जाएगा। इसमें निर्माण कार्य के साथ रखरखाव का भी प्रावधान किया गया है।

15 साल के लिए रखरखाव की जिम्मेदारी होगी

डीपीआर में जल निगम ने 15 साल के लिए रखरखाव का भी प्रावधान किया है। जल निगम और नगर निगम दोनों के पास कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है, इसीलिए रखरखाव का प्रावधान किया गया है ताकि इतनी अधिक लागत के बाद परियोजना के संचालन में बाधा न आए। डीपीआर में 397 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पर और 233 करोड़ रुपये 15 साल के रखरखाव पर खर्च किए जाएंगे।

Krishna Bihari Singh

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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