CJP आंदोलन से चर्चा में आए मोहम्मद इरफान कितने पढ़े-लिखे? क्या करते हैं काम; कहां से सीखा संविधान
Mohammad Irfan: सीजेपी आंदोलन से चर्चा में आए मोहम्मद दिल्ली में एक छोटी से झुग्गी बस्ती में रहते हैं। फेरी चलाते हैं और कभी स्कूल नहीं गए। लेकिन बेबाकी और संविधान के प्रति उनकी समझ हैरान करने वाली है।

Mohammad Irfan: कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी का आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और अन्य मांगों के पूरी होने के साथ ही समाप्त हो गया है। जंतर-मंतर से जेन-जी की भीड़ नदारद हो चुकी है, लेकिन प्रदर्शन के लिए पहुंचे युवाओं की कहानियां और किस्से अभी भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। इन्हीं में से एक चेहरा है- मोहम्मद इरफान। संविधान और कविताओं के जरिए अपनी बात बेबाकी से रखने वाले इरफान सोशल मीडिया की नई सनसनी है। इंटरव्यू के दौरान उनकी बातें और निजी जीवन का संघर्ष लोगों को हैरान और भावुक कर रहा है।
सीजेपी आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए 35 साल के मोहम्मद इरफान ने कभी स्कूल नहीं देखा। मीडिया चैनल से बातचीत में वो कहते हैं कि परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के चलते वे पढ़-लिख नहीं सके। हालांकि उनकी बेबाकी, कविताएं और संविधान के प्रति समझ हैरान कर देने वाली है। इरफान का कहना है कि यह सब मोबाइल से सीखे हैं। उन्होंने गूगल वॉयस सर्च, यूट्यूब और इंटरनेट के जरिए खुद ही जानकारी हासिल की। लोकतंत्र, संविधान, मजदूरों के अधिकार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर उनकी समझ ने लोगों को हैरान कर दिया।
पिता को बिना बताए सीजेपी आंदोलन में पहुंचे
मोहम्मद इरफान बताते हैं कि सीजेपी आंदोलन में जाने का मन वो काफी पहले ही बना चुके थे। उन्होंने अपने पिता से इसके लिए पूछा भी... लेकिन पिताजी ने मना कर दिया था। उन्हें मेरी चिंता थी। लेकिन मैं बिना बताए यहां आ गया। मैं खुद को यहां से दूर नहीं कर सका। यहां छात्र लोग जिस उम्मीद और इच्छा के लिए इकट्ठा हुए हैं। मैं यहां नहीं आता तो खुद को माफ नहीं कर पाता।
इंटरनेट, गूगल और यूट्यूब ही यूनिवर्सिटी
दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले 35 वर्षीय फेरी चलाने वाले मोहम्मद इरफान की जो बात लोगों को सबसे असाधारण लगी, वह यह थी कि वह कभी स्कूल नहीं गए। उन्होंने गूगल से ही सारा ज्ञान प्राप्त किया, वो भी वॉइस सर्च के जरिए। लोकतंत्र और श्रम अधिकारों के मामलों में स्पष्टता के अलावा, इरफान भगत सिंह की कविताओं की पंक्तियां भी बोले। कुछ ही घंटों में, इरफान के लोकतंत्र, श्रम अधिकारों और भारत की शिक्षा प्रणाली पर दिए गए भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। जिस व्यक्ति ने कभी स्कूल में कदम नहीं रखा था, वह अचानक संविधान को इतनी स्पष्टता से समझा रहा था कि लाखों लोग दंग रह गए।
इरफान का दर्द: भरपेट रोटी खा लेना जीवन नहीं ...
सीजेपी आंदोलन में छात्रों के समर्थन में आगे आए इरफान ने लल्लनटॉप चैनल से बातचीत में अपना दर्द साझा किया। वो कहते हैं कि सिर्फ भरपेट रोटी खा लेना जीवन नहीं है... ग्रामीण भारत में जीवन नरक है। शहर का जीवन नरक हो चुका है। आप 500 रुपए की मजदूरी हमसे जीएसटी टैक्स लेते हो। कुछ लोग कहते हैं कि हम टैक्सपेयर्स के पैसों पर पल रहे हैं... हम किसी के पैसों पर नहीं पल रहे। हम नमक, दाल, तेल खरीदते हैं तो उस पर टैक्स देते हैं। हम इस देश के कार्यदाता हैं, लेकिन सिस्टम के सताए हुए हैं।
राहुल गांधी ने घर जाकर मुलाकात की
मोहम्मद इरफान की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को उनके घर जाकर मुलाकात की। राहुल ने कहा कि इस युवक का नजरिया बताता है कि भारत की सबसे बड़ी ताक़त उसके युवाओं में बसती है। गांधी ने इरफान के साथ मुलाकात की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए कहा कि इरफान जैसे युवाओं की सोच उनके हालात की मोहताज नहीं है।
इरफान का नजरिया देश के युवाओं की उम्मीदः राहुल गांधी
उन्होंने कहा, ''संविधान की उसकी समझ, देश के प्रति उसका नजरिया और सीखने की उसकी इच्छा यही बताती है कि भारत की सबसे बड़ी ताक़त उसके युवाओं में बसती है।'' गांधी ने कहा कि इरफान जैसे लाखों युवा देश की असली उम्मीद हैं और वे जिज्ञासु, संवेदनशील तथा अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग हैं।


