दिल्ली बवाल में 6 FIR दर्ज, साजिश के भी सबूत मिले; 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
20 जुलाई को दिल्ली में हुए बवाल के सिलसिले में पुलिस ने अब तक 6 एफआईआर दर्ज किए हैं। इनमें बीएनएस, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने वाले कानून की कई धाराओं को शामिल किया गया है। पुलिस इस पूरे मामले के पीछे किसी बड़ी और आपराधिक साजिश की भी जांच कर सकती है।

दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित संसद मार्च के दौरान हुई कथित हिंसा, तोड़फोड़ और अन्य घटनाओं के सिलसिले में अब तक 6 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पुलिस इस पूरे मामले के पीछे किसी बड़ी और आपराधिक साजिश की भी जांच कर सकती है। उन्होंने बताया कि ये मामले पार्लियामेंट स्ट्रीट, कनॉट प्लेस और अन्य थानों में दर्ज किए गए हैं। इनमें भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने वाले कानून की कई धाराओं को शामिल किया गया है।
पुलिस सूत्र ने बताया कि एक एफआईआर कनॉट प्लेस में रीगल सिनेमा के पास हुई हिंसा और पत्थरबाजी के सिलसिले में दर्ज की गई, जबकि अन्य मामले गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, संसद सत्र के दौरान बिना इजाजत ड्रोन उड़ाने और हिंसा के पीछे की कथित साजिश से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि मारपीट, कानून को अपने हाथ में लेने और अन्य संबंधित अपराधों के सिलसिले में भी एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में दर्ज एफआईआर में BNS की कई धाराएं लगाई गई हैं। एफआईआर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव अधिनियम के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जमा की
एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से भीड़ जमा की, सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डाला, सरकारी अधिकारियों को उनके काम करने से रोका, हिंसा की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और इलाके में तैनात कई पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया।
सबूतों की जांच कर रहे
जांच करने वाले अधिकारी हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन से लिए गए विज़ुअल, मोबाइल फोन वीडियो और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे जांच के हिस्से के तौर पर सोशल मीडिया कंटेंट और दूसरे डिजिटल मटीरियल का भी विश्लेषण कर रहे हैं।
कथित साजिश की जांच
पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि हिंसा के पीछे की कथित साजिश से जुड़ी एफआईआर तब दर्ज की गई, जब जांचकर्ताओं को इसके पीछे की योजना का संकेत देने वाले कई अहम सबूत मिले। दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि वह फुटेज की सच्चाई की पुष्टि कर रही है और लागू ड्रोन नियमों के संभावित उल्लंघन की जांच कर रही है।
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
सोमवार को हुई झड़पों के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अहम जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है, गाड़ियों की चेकिंग तेज कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों, सरकारी दफ्तरों और मुख्य चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इन झड़पों में 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और पुलिस की 20 से ज्यादा गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


