CJP ने अब राजस्थान के शिक्षा मंत्री को चुनौती दी, रंका ने कहा- मैं अपनी टीम के साथ आ रहा हूं

एएनआई, नई दिल्ली
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कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रंका ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को चुनौती दी। रांका ने कहा कि वे अपने कार्यकाल के दौरान बनाए गए 10 बेहतरीन शिक्षण परिसरों को दिखाएं, वह बंगाल से लौटने के बाद अपनी पूरी टीम के साथ उन स्कूलों का दौरा करेंगे।

सीजेपी के आशुतोष रंका और राजस्थान के मंत्री मदन दिलावर।
सीजेपी के आशुतोष रंका और राजस्थान के मंत्री मदन दिलावर।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक आशुतोष रंका ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि वे अगले कुछ दिनों में राजस्थान के स्कूलों का दौरा करने वाले हैं। रंका ने लिखा कि मैं बंगाल में तीन दिन बिताने के बाद जयपुर लौट रहा हूं। अगले कुछ दिनों में मैं अपनी पूरी टीम के साथ राजस्थान के स्कूलों का दौरा करूंगा। मदन दिलावर जी, मेरे पास आपके लिए एक प्रस्ताव है। मुझे उन 10 सबसे शानदार स्कूलों के बारे में बताएं जो आपके कार्यकाल में बने हैं। मैं और मेरी टीम उन स्कूलों का भी दौरा करेंगे। आपके पास दिखाने के लिए कम से कम ऐसे 10 स्कूल तो होंगे ही।

आशुतोष रंका ने यह चुनौती राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले एक आधिकारिक सर्कुलर के बाद दी। पुलिस की संभावित कार्रवाई की परवाह न करते हुए रांका ने घोषणा की कि राज्य भर में जर्जर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। एक्स पर एक पोस्ट में रंका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर निशाना साधते हुए कहा कि मदन दिलावर जी, या तो राजस्थान के सभी जर्जर स्कूलों को ठीक करवाइए या फिर हमारे खिलाफ पहले से ही एफआईआर दर्ज करवा लीजिए। आप हमें पहले से गिरफ्तार भी कर सकते हैं। सरकार आपकी है, पुलिस आपकी है। लेकिन जब तक राजस्थान के सभी स्कूल ठीक नहीं हो जाते, हम स्कूलों का निरीक्षण करना बंद नहीं करेंगे।

यह टकराव राजस्थान के बीकानेर में सेकेंडरी एजुकेशन के डायरेक्टर ललित कुमार द्वारा जारी एक जरूरी सर्कुलर (16 अगस्त, 2026) के बाद शुरू हुआ है। इसमें भारतीय संविधान के आर्टिकल 21, सुप्रीम कोर्ट के केएस पुट्टास्वामी प्राइवेसी फैसले और नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की गाइडलाइंस का हवाला दिया गया है। यह आदेश सरकारी शिक्षण संस्थानों में बाहरी लोगों के एंट्री पर रोक लगाता है। प्रिंसिपल या संस्थान के प्रमुख की मंजूरी के बिना बाहरी लोगों का स्कूल परिसर में आना मना है। हालांकि, आधिकारिक काम से आने वाले सरकारी अधिकारियों पर रोक नहीं रहेगी।

स्कूल परिसर में घुसने से पहले विजिटर रजिस्टर में एंट्री करना जरूरी है। कोई भी बाहरी व्यक्ति किसी टीचर या अधिकृत स्टाफ सदस्य के साथ हुए बिना क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल, खेल के मैदान, टॉयलेट या स्टूडेंट एक्टिविटी जोन में नहीं जा सकता। बिना पहले से लिखित अनुमति के छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग करना मना है।

स्कूल अधिकारियों को छात्रों की ऐसी फोटो, वीडियो या निजी जानकारी इकट्ठा करने, पब्लिश करने या फैलाने से रोकना होगा जिससे उनकी सुरक्षा, सम्मान या प्राइवेसी को खतरा हो। प्रिंसिपल के पास यह अधिकार है कि वे सुरक्षा, प्राइवेसी, अनुशासन या पढ़ाई-लिखाई के माहौल में खलल डालने वाले किसी भी विजिटर को अंदर आने से मना कर दें या बिना अनुमति आए लोगों को बाहर जाने का निर्देश दें।

अगर कोई अनाधिकृत व्यक्ति स्कूल में घुसता है और वापस जाने से मना करता है, बिना इजाजत रिकॉर्डिंग करता है या स्कूल के कामकाज में बाधा डालता है तो स्कूल प्रशासन को तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित करना होगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, पोक्सो एक्ट (2012), जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (2015) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (2000) के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह प्रशासनिक आदेश सीजेपी के 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत के साथ आया है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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