बच्चे का पासपोर्ट बनवाने के लिए पिता का नाम जरूरी नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Apr 10, 2026 08:54 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नई दिल्ली, हेमलता कौशिक
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Delhi News : दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि बच्चा पूरी तरह से मां या पिता में से किसी एक के संरक्षण में है, तो पासपोर्ट बनवाने के लिए दूसरे का नाम जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जहां पिता ने अधिकार छोड़ दिए हों, वहां जबरन नाम जोड़ना जरूरी नहीं।

बच्चे का पासपोर्ट बनवाने के लिए पिता का नाम जरूरी नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Delhi News : दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि नाबालिग बच्चा बगैर पिता के नाम के भी पासपोर्ट बनवा सकता है। अदालत ने कहा कि यह नियम माता या पिता दोनों पर लागू हो सकता है, बशर्ते स्थिति यह दर्शाती हों कि बच्चा पूरी तरह मां या पिता दोनों में से किसके संरक्षण में है।

जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव की बेंच ने पांच साल की बच्ची की मां के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह बात कही। बेंच ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को कहा है कि वह बच्ची का पासपोर्ट पिता के नाम के बगैर बनाए। इस याचिका में बच्ची ने पिता के नाम के बिना पासपोर्ट बनाने की मांग की थी। बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि माता-पिता का आपस में विवाद था। जब बच्ची वर्ष 2021 में चार महीने की थी तो उसके माता-पिता ने अदालत में आपसी समझौते से तलाक लेने का फैसला किया। बच्ची मां के पास रही। यहां तक कि स्कूल में उसका सरनेम मां और नाना-नानी के सरनेम पर दर्ज है। इसके अलावा, बेंच ने यह भी गौर किया कि पिता ने तलाक के समझौते में बच्ची पर कोई अधिकार नहीं दिखाया है। ना ही पिता या उसके परिवार ने बच्ची से भविष्य में मिलने की इच्छा जाहिर की है। इस पर बेंच ने कहा कि इस तरह के रिश्तों में जबरन बच्चों के साथ पिता अथवा मां का नाम जोड़कर रखना जरूरी नहीं है।

पिता से हक मांगा तो पासपोर्ट रद्द होगा

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि बच्ची बालिग होने पर पिता से किसी भी तरह का अधिकार मांगती है, तो क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को यह हक होगा कि वह बच्ची के उस पासपोर्ट को रद्द कर नए सिरे से बनाने को कहे। नए सिरे से बनने वाले पासपोर्ट में पिता के नाम को अनिवार्य किया जाए। बेंच ने कहा कि क्योंकि यहां स्पष्ट है कि बच्ची का संरक्षण सिंगल पैरेंट पर है। इसलिए बच्ची के पासपोर्ट में मां का नाम ही शामिल किया जाए।

एकल अभिभावक पर पिता ने दी थी सहमति

दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्ची के माता-पिता के बीच हुए तलाक के समझौते पर गौर करते हुए पाया कि यहां पिता का रवैया बेहद रुखा रहा। पिता ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करते समय सहमति जाहिर की कि नाबालिग बेटी उसकी पत्नी के पास रहेगी।

इन दस्तावेजों की पड़ती है जरूरत

भारत में नया पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना। उम्र का प्रमाण (आधार, पैन, या मार्कशीट)। पते का वैध प्रमाण (बिजली बिल, बैंक पासबुक) होना अनिवार्य है। एक अक्तूबर 2023 से नए नियमों के तहत जन्मतिथि प्रमाण के लिए जन्म प्रमाणपत्र या स्कूल छोड़ने का सर्टिफिकेट जरूरी है। पुलिस सत्यापन (क्लीन रिकॉर्ड) आवश्यक है।

Praveen Sharma

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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