दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में अब अंदाजे से हो रही मरीजों की कीमोथेरेपी, IHC जांच हुई बंद
दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान में आईएचसी जांच के बिना अंदाज से ही कैंसर मरीजों को टारगेटेड कीमोथेरेपी दी जा रही है। इसका कारण अस्पताल में आईएचसी जांच बंद होना है। इससे कैंसर मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज की क्या स्थिति है इसका अंदाजा दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान (डीएससीआई) में देखा आकर जा सकता है। इस अस्पताल में अभी आईएचसी जांच के बिना अंदाज से ही कैंसर मरीजों को टारगेटेड कीमोथेरेपी दी जा रही है। इसका कारण अस्पताल में आईएचसी जांच बंद होना है। इससे कैंसर मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर व कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि टारगेटेड कीमोथेरेपी से कैंसर मरीजों का इलाज और उसका परिणाम बेहतर होता है। स्तन कैंसर, फेफड़े के कैंसर सहित शरीर हर अंग के कैंसर के भी अलग-अलग प्रकार होते हैं। उस पर बीमारी की गंभीरता और इलाज निर्भर करता है। बायोप्सी जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद आईएचसी जांच की जाती है। इसके जरिये मरीज को हुए कैंसर के प्रकार का पता लगाकर कीमोथेरेपी दी जाती है। इससे इलाज सटीक होती है। अभी डीएससीआई में करीब ढाई माह से आईएचसी जांच की किट उपलब्ध नहीं है। इस वजह से कैंसर मरीजों की यह जांच नहीं हो पा रही है।
कैंसर के प्रकार की पहचान के लिए एक-एक मरीज को तीन-चार तरह के मार्कर की जांच करनी पड़ती है। इस वजह से निजी डायग्नोस्टिक लैबों में इस जांच पर 4000-16,000 रुपये तक खर्च आता है। डीएससीआई में ज्यादातर गरीब मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं और दूसरे राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इस मामले पर संस्थान की निदेशक डॉ. सविता अरोड़ा से अस्पताल का पक्ष मांगा गया, लेकिन जवाब नहीं मिला।
दिसंबर से कॉन्ट्रैक्ट खत्म
आईएचसी जांच किट उपलब्ध कराने वाली एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट पिछले वर्ष जून में खत्म हो गया था। इसके बाद उसे छह माह का सेवा विस्तार दिया गया। वह भी पिछले वर्ष दिसंबर में खत्म हो गया। छह माह के सेवा विस्तार के लिए दोबारा फाइल चलाई गई थी, लेकिन न कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया गया और न किट खरीद की गई।
आईएचसी जांच इलाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण
एम्स के पूर्व डीन व कैंसर विशेषज्ञ डॉ. पीके जुलका ने बताया कि हर तरह के अंगों के कैंसर की प्रकार की पहचान और इलाज के लिए आईएससी जांच आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर मरीज में बायोप्सी से स्तन कैंसर की पुष्टि होने के बाद आईएचसी जांच के जरिये ईआर (एस्ट्रोजन रिसेप्टर), पीआर, एचईआर2, केआई67 प्रोटीन मार्कर की जांच की जाती है। इनमें से जो मार्कर पॉजिटिव पाया जाता है उसके अनुसार कीमो दी जाती है, जो उस मार्कर को सीधा टारगेट करती है। इस तरह फेफड़े व अन्य कैंसर में भी बीमारी के असर कारण की पहचान कर टारगेटेड कीमोथेरेपी दी जाती है।
रिपोर्ट - रणविजय सिंह


