दिल्ली के सदर बाजार में दुकान में आग लगने से एक की मौत, जला हुआ शव बरामद
दिल्ली के सदर बाजार में एक दुकान में आग लगने से एक आदमी की मौत हो गई। दुकान में आग लगने की सूचना शाम करीब 7:45 बजे मिली। अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही निकटतम फायर ब्रिगेड टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया।

दिल्ली के सदर बाजार में एक दुकान में आग लगने से एक आदमी की मौत हो गई। दुकान में आग लगने की सूचना शाम करीब 7:45 बजे मिली। अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही निकटतम फायर ब्रिगेड टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया।
दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, बुधवार शाम को सदर बाजार की एक दुकान में आग लग गई। इसके बाद घटनास्थल से एक आदमी का जला हुआ शव बरामद किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी के सदर बाजार इलाके में एक दुकान में आग लगने की सूचना शाम करीब 7:45 बजे मिली। अग्निशमन अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही निकटतम फायर ब्रिगेड टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया।
उन्होंने कहा कि हमें आग लगने की सूचना मिली। निकटतम दमकल स्टेशन से पहली दमकल तुरंत मौके पर पहुंची। यहां पहुंचने पर पता चला कि आग थोड़ी गंभीर थी। आसपास के दमकल स्टेशनों ने भी अपनी दमकल भेजीं और अब कुल 16 दमकल यहां काम कर रही हैं।
उन्होंने आगे बताया कि टीमें फिलहाल धुएं को नियंत्रित करने और शीतलन अभियान चलाने में लगी हुई हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम धुएं पर काबू पाने का काम कर रहे हैं और उसके बाद हम हताहतों की जांच करेंगे।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


