SC के आदेश पर 8 राज्यों में 77 जगहों पर CBI की छापेमारी, बिल्डरों के खिलाफ 22 नए केस दर्ज
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 77 जगहों पर छापेमारी की। सीबीआई बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के बीच गठजोड़ की जांच कर रही है। यह गठजोड़ भोले-भाले घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी कर रहा था। इस सिलसिले में 22 नई एफआईआर दर्ज की गई है।

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 77 जगहों पर छापेमारी की। सीबीआई बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के बीच गठजोड़ की जांच कर रही है। यह गठजोड़ भोले-भाले घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी कर रहा था। इस सिलसिले में 22 नई एफआईआर दर्ज की गई है।
सीबीआई ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के बीच मौजूद नापाक गठजोड़ की जांच के सिलसिले में 22 नई एफआईआर दर्ज कीं और 8 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 77 जगहों पर छापेमारी की। सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा कि ये समन्वित तलाशी अभियान देशव्यापी कार्रवाई का हिस्सा है। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री जब्त की है।
28 मामले जांच के अंतिम चरण में
एक अधिकारी ने बताया कि इन छापों का मकसद आवास और रियल एस्टेट सेक्टर में कथित तौर पर फंड के गलत इस्तेमाल, वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ी बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए अहम सबूत इकट्ठा करना था। सीबीआई ने इससे पहले अलग-अलग बिल्डरों के खिलाफ 28 मामले दर्ज किए थे। एजेंसी ने कहा कि ये मामले अब जांच के अंतिम चरण में हैं।
घर खरीदारों ने याचिकाएं दायर की थीं
पिछले साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को एनसीआर में बिल्डरों के खिलाफ सात मामले दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 1000 से ज्यादा घर खरीदारों ने याचिकाएं दायर की थीं। बाद में अदालत ने एजेंसी से मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मोहाली और प्रयागराज में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की जांच के लिए छह और एफआईआर दर्ज करने को कहा।
ज्यादातर मामले एनसीआर से जुड़े
इनमें ज्यादातर मामले एनसीआर के प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं, जिनमें सबवेंशन स्कीम के जरिए घर खरीदने वालों को धोखा दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बैंक अधिकारियों ने इस स्कीम के तहत बिल्डरों को बिना पूरी जांच-पड़ताल किए ही लोन दे दिए, क्योंकि ये प्रोजेक्ट्स सिर्फ कागजों पर ही रह गए।
बिना जांच-पड़ताल के लोन जारी कर दिए
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सीबीआई ने बिल्डरों और बैंक अधिकारियों के बीच घर खरीदारों को धोखा देने वाले नापाक गठजोड़ की जांच के लिए 22 एफआईआर दर्ज की हैं और 77 स्थानों पर छापेमारी की है। इनमें से अधिकांश मामले एनसीआर में सब्सिडी योजनाओं के तहत चल रही परियोजनाओं से संबंधित हैं, जहां बैंकों ने केवल कागजों पर मौजूद परियोजनाओं के लिए बिना उचित जांच-पड़ताल के लोन जारी कर दिए।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


