करोड़ों की घूस मांगने में दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर गिरफ्तार, CBI को लेन-देन के सबूत मिले
राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर को करोड़ों रुपए की घूस मांगने और वसूली की साजिश में गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी कर अहम सबूत भी बरामद किए हैं। आरोपी इंस्पेक्टर दिल्ली पुलिस के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में तैनात है।

राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर को कथित तौर पर करोड़ों रुपए की रिश्वत मांगने और वसूली की साजिश में गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी बरामद किए हैं। आरोपी इंस्पेक्टर दिल्ली पुलिस के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में तैनात है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर सुभाष यादव को कथित तौर पर करोड़ों की रिश्वत मांगने व वसूली की साजिश में गिरफ्तार किया है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में तैनात इस अधिकारी की गिरफ्तारी से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। सीबीआई ने आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी बरामद किए हैं, जिससे इस बड़े रिश्वत नेटवर्क के और खुलासे होने की संभावना है।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में तैनात
आरोपी इंस्पेक्टर सुभाष यादव दिल्ली पुलिस के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स में तैनात है। इंस्पेक्टर पर एक कारोबारी से कार्रवाई न करने व मामले को दबाने के बदले भारी रकम की मांग करने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच शुरू की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर ट्रैप की कार्रवाई की गई। इसके बाद आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया। रिश्वत की रकम चरणबद्ध तरीके से वसूले जाने की योजना थी।
रिश्वत नेटवर्क की जांच में जुटी सीबीआई
सीबीआई मामले में अन्य पुलिसकर्मियों और बिचौलियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। क्या इससे पहले भी इसी तरह की वसूली की गई थी। जांच के दौरान बैंक खातों, मोबाइल फोन व डिजिटल लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। इसी मामले में सीबीआई ने दिल्ली पुलिस के नारकोटिक्स सेल में तैनात एक हेड कांस्टेबल को 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और लेते हुए 22 अप्रैल को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोपी दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल, द्वारका में तैनात था।
झूठे मामले में फंसाने की धमकी
सीबीआई ने 21 अप्रैल 2026 को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। आरोप है कि आरोपी हेड कांस्टेबल और अन्य अज्ञात लोगों ने एक महिला शिकायतकर्ता को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस मामले की जांच के दौरान बड़े नेक्सस का पता चला और इंस्पेक्टर की भूमिका करोड़ों रुपए के लेनदेन में सामने आई ।
रसूख के दम पर लंबी तैनाती
सूत्रों के अनुसार सुभाष यादव लंबे समय तक द्वारका जिले में तैनात रहा। बताया जाता है कि उसने कम समय में कई वरिष्ठ अधिकारियों से करीबी संबंध बना लिए थे। पूर्व के दो डीसीपी और एक स्पेशल सीपी से उसकी नजदीकियों की भी चर्चा रही।
रिश्तेदारों की बेनामी संपत्ति पर एजेंसी की नजर
सीबीआई अब सुभाष यादव के रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के आर्थिक साम्राज्य की भी गहनता से जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि यादव के भाई के पास भारी मात्रा में बेनामी संपत्ति है। आशंका जताई जा रही है कि इंस्पेक्टर ने अपनी काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने सगे-संबंधियों के नाम पर निवेश किया था ताकि वह जांच एजेंसियों की नजरों से बच सके। फिलहाल, सभी संदिग्धों का वित्तीय लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मामले की जांच जारी है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


