‘पिंजरे का तोता कभी-कभी पिटबुल बन जाता है’; चिदंबरम ने क्यों CBI-ED को लेकर की ऐसी बात
सीबीआई और ईडी की शक्तियां बढ़ाने के विचार का विरोध करते हुए पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने एक परिचर्चा में कहा कि नियंत्रण और निगरानी के बिना अधिक शक्तियां निरंकुश बनाती हैं। इससे पिंजरे का तोता भी पिटबुल बन जाता है।

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सीबीआई और ईडी को और अधिक शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि निगरानी और नियंत्रण की कमी के कारण ‘कभी-कभी पिंजरे में बंद तोता भी पिटबुल बन जाता है’।
चिदंबरम ने शुक्रवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद की लिखी किताब ‘पुलिसिंग द रिपब्लिक’ की लॉन्चिंग के मौके पर आयोजित परिचर्चा में यह बात कही। यह परिचर्चा पुलिस सुधारों और वर्दीधारी कर्मियों की ज्यादतियों पर केंद्रित थी। चिदंबरम ने सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों को और ज्यादा शक्तियां और स्वायत्तता देने के विचार को तो खारिज कर दिया, लेकिन आंतरिक सुधारों पर सहमति जताई।
अफसरों के कम पर उठाए सवाल
उन्होंने पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा, ''पुलिस में एसएचओ से लेकर डीजीपी तक एक पदानुक्रम (hierarchy) व्यवस्था होती है। सीबीआई में बेहतरीन अफसर काम करते हैं, जिनमें से अधिकतर राज्यों से डेपुटेशन पर आते हैं। वो राज्य के एक बेहतरीन अफसर होते हैं, लेकिन वह केंद्र में आकर खराब अफसर क्यों बन जाते हैं? क्योंकि निगरानी और नियंत्रण की कमी होती है। पिंजरे में बंद तोता कभी-कभी पिटबुल बन सकता है।''
कांग्रेस नेता चिदंबरम ने कहा कि वह राज्य स्तर पर और शायद केंद्र स्तर पर भी राजनीतिक दखलअंदाजी की संभावना से इनकार नहीं करते, लेकिन अफसरों को संगठन के पदानुक्रम और अनुशासन का पालन करना चाहिए।
ज्यादा शक्तियां देने से देश में उथल-पुथल मच जाएगी
चिदंबरम ने यशोवर्धन आजाद की इस राय का विरोध किया कि ईडी और सीबीआई को और अधिक शक्तियां दी जानी चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा, "मैं यशोवर्धन की बात से सहमत नहीं हूं। ऐसा लगता है कि उनके मन में ईडी और सीबीआई के लिए कुछ सम्मान है और उनका कहना है कि उन्हें और अधिक शक्तियां दी जानी चाहिए। अगर उन्हें और शक्तियां दी गईं तो इस देश में भारी उथल-पुथल मच जाएगी।"
उन्होंने कहा, “सीबीआई और ईडी ने अपने वैध अधिकार-क्षेत्र का बहुत ज्यादा उल्लंघन किया है। वो खुद ही कानून बन गए हैं।”
ज्यादा से ज्यादा ट्रांसफर हो सकता है : चिदंबरम
पूर्व गृह मंत्री ने पूछा कि IAS और IPS अफसर राजनेताओं के सामने क्यों डटकर खड़े नहीं सकते। ज्यादा से ज्यादा उनका ट्रांसफर ही हो सकता है, लेकिन वो आपकी जान तो नहीं ले सकते। मेरे हिसाब से सीबीआई और ईडी के कामकाज पर बाहरी निगरानी और देखरेख की जरूरत है।
चिदंबरम ने एनआईए एक्ट 2008 में हुए संशोधन का उदाहरण देते हुए बताया कि वो एक प्रावधान लाए थे जिसके तहत एनआईए की चार्जशीट को दो अफसरों के एक स्वतंत्र पैनल से मंजूरी लेना जरूरी है, जिसमें एक हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज और दूसरे एक सीनियर पुलिस अधिकारी होंगे।
कांग्रेस नेता ने सीवीसी को बताया नाकाम
उन्होंने कहा कि सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था है, हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि सीवीसी इस देश में पूरी तरह से नाकाम रहा है, क्योंकि इसके मंजूर की गई कई चार्जशीट के मामलों में या तो आरोपी बरी हो गए या फिर अदालतों ने चार्जशीट ही खारिज कर दी। उन्होंने कहा, “सीवीसी हर चार्जशीट को मंजूरी कैसे दे सकता है? उन्हें कुछ चार्जशीट तो खारिज कर देनी चाहिए... लेकिन मेरा मानना है कि किसी व्यक्ति पर गंभीर अपराध का आरोप लगाने से पहले हर चार्जशीट की जांच एक स्वतंत्र संस्था द्वारा की जानी चाहिए।”
वहीं इस चर्चा के दौरान किताब के लेखक यशोवर्धन आजाद ने कहा कि सीबीआई के राजनीतिक मामलों की निगरानी का काम लोकपाल को सौंपा जाना चाहिए। आजाद ने कहा कि ईडी वही करेगी जो राजनेता कहेंगे और आपराधिक कानून इसमें मदद कर रहे हैं। यूएपीए में कुछ पाबंदियां थीं, लेकिन अब तो कोई थानेदार भी किसी के खिलाफ केस दर्ज कर सकता है।


