दिल्ली के आनंद विहार में बदलेगा बसों का रूट, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का नया प्रस्ताव तैयार
दिल्ली के आनंद विहार में बसों का रूट बदलने वाला है। ट्रैफिक पुलिस ने आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग को जाम मुक्त बनाने के लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को जल्द ही व्यवहार्यता जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को भेजा जाएगा।

दिल्ली के आनंद विहार में बसों का रूट बदलने वाला है। ट्रैफिक पुलिस ने आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग को जाम मुक्त बनाने के लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को जल्द ही व्यवहार्यता जांच के लिए संबंधित एजेंसियों को भेजा जाएगा।
दरअसल, आनंद विहार के सामने चौधरी चरण सिंह मार्ग पर लंबे समय से यातायात दबाव बना रहता है। अतिक्रमण हटाने सहित कई प्रयासों के बावजूद समस्या पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने आनंद विहार बस अड्डा और रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग को जाम मुक्त बनाने के लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है।
प्रस्ताव के तहत गाजीपुर से आनंद विहार की ओर आने वाले टेल्को फ्लाईओवर पर हाइट बैरियर लगाने की योजना है, ताकि बसें फ्लाईओवर के बजाय सर्विस रोड का उपयोग करें। साथ ही पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र के पास से नाले के ऊपर नया फ्लाईओवर बनाकर बसों को सीधे बस अड्डे में प्रवेश दिलाने का सुझाव है। इससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से आने वाली बसें मुख्य मार्ग को बाधित किए बिना बस अड्डे पहुंच सकेंगी।
मल्टी मॉडल नीति के तहत पूर्व में प्रस्तावित बस निकासी फ्लाईओवर पर भी पुनर्विचार की सिफारिश की गई है। इसके निर्माण से बसों को यू-टर्न लेकर गाजीपुर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रस्ताव में टेल्को फ्लाईओवर से पहले तक सीमेंटेड बैरियर लगाकर गाजीपुर जाने वाले वाहनों के लिए दो समर्पित लेन बनाने का सुझाव है, जबकि तीसरी लेन स्थानीय यातायात के लिए होगी। इससे लोगों को सुविधा होगी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


