तिहाड़ में बंद गैंगस्टर कौशल चौधरी के ठिकानों पर बुलडोजर ऐक्शन, काली कमाई से बनी प्रॉपर्टी ढहाई
तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर कौशल चौधरी की अवैध संपत्तियों पर बुधवार को प्रशासन का बुलडोजर चला। गुरुग्राम के सेक्टर-31 क्राइम ब्रांच ने गहन जांच और राजस्व रिकॉर्ड खंगालने के बाद नाहरपुर रूपा इलाके में स्थित उस जमीन और इमारत को चिन्हित कर लिया है, जिसे अपराध की काली कमाई से बनाया गया था।

तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर कौशल चौधरी की अवैध संपत्तियों पर बुधवार को प्रशासन का बुलडोजर चला। गुरुग्राम के सेक्टर-31 क्राइम ब्रांच ने गहन जांच और राजस्व रिकॉर्ड खंगालने के बाद नाहरपुर रूपा इलाके में स्थित उस जमीन और इमारत को चिन्हित कर लिया है, जिसे अपराध की काली कमाई से अवैध तरीके से बनाया गया था। दोपहर ड्यूटी मजिस्ट्रेट आरएस बाठ की अगुवाई में नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची और इस अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया।
कौशल चौधरी ने न केवल अपराध की दुनिया में दहशत फैलाई, बल्कि अवैध वसूली के पैसे को रियल एस्टेट और अवैध निर्माणों में बड़े पैमाने पर निवेश भी किया। सेक्टर-31 क्राइम यूनिट ने पिछले कई हफ्तों से नाहरपुर रूपा और आसपास के इलाकों में उन संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया था, जो या तो कौशल के नाम पर हैं या उसके करीबियों के जरिए संचालित हो रही हैं। जांच में सामने आया कि इस संपत्ति का न तो नक्शा पास है और न ही यह वैध भूमि पर बनी है।
भारी पुलिस बल तैनात रहा
नाहरपुर रूपा क्षेत्र में पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। तोड़े जाने वाली जगह के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट आरएस बाठ ने बताया कि कार्यवाही पूरी तरह से कानून के दायरे में और तय नियमों के अनुसार की गई है।
पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार का कहना है कि गैंगस्टरों और अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी। जब तक अपराधियों की आर्थिक रीढ़ नहीं टूटेगी, तब तक उनके नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। यह कार्रवाई पुलिस की अवैध निर्माणों और गैंगस्टरों की संपत्तियों पर सख्ती की नीति का हिस्सा है। यह उन अपराधियों के लिए एक सीधा संदेश है जो जेल के भीतर से अपना नेटवर्क चला रहे हैं।
30 से ज्यादा मामले दर्ज
कौशल गुरुग्राम के नाहरपुर रूपा गांव का रहने वाला है। उस पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जमीन विवाद और भाई की हत्या का बदला लेने के लिए उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। अब वह बंबीहा सिंडिकेट के साथ मिलकर इंटरनेशनल लेवल पर अपना गैंग संचालित कर रहा है। उसकी पत्नी मनीषा चौधरी भी लेडी डॉन के नाम से फेमस है। दोनों जेल में बंद हैं और वहीं से अपना सिंडिकेट चला रहे हैं। उसके खिलाफ हत्या, फिरौती और अन्य संगीन अपराधों के 30 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।
2019 में दुबई से भारत लाया गया
साल 2005 में जमीनी विवाद में कौशल के भाई की गैंगस्टर सुदेश उर्फ चेलू ने हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कौशल ने राजस्थान के बदमाश सूबे गुर्जर और अमित डागर के साथ मिलकर अपना गैंग बना लिया। इसके बाद उसके गुर्गों ने सुदेश का मर्डर कर दिया। सुदेश के मर्डर के बाद कौशल गिरफ्तार हो गया। जेल में उसकी मुलाकात दूसरे बदमाशों के साथ हुई। इसके बाद जेल से ही उसने सुदेश की पत्नी के मर्डर का प्लान बनाया। साल 2009 में सुदेश की पत्नी की हत्या कराई। साल 2017 के आखिर में कौशल थाइलैंड के रास्ते दुबई भाग गया। उसके खिलाफ फरवरी 2019 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ। साल 2019 में उसे दुबई से भारत लाया गया।
पंजाब में करवा चुका कई मर्डर
बंबीहा सिंडिकेट में शामिल होने के बाद ही कौशल चौधरी ने अपने गुर्गों के जरिए पंजाब के मोहाली में यूथ अकाली नेता विक्की मिड्डूखेड़ा, जालंधर में इंटरनेशनल कबड्डी खिलाड़ी संदीप नांगल अंबिया सहित कई मर्डर करा चुका है। पंजाब में उसके खिलाफ कई केस दर्ज हैं। कौशल चौधरी को गैंगस्टर लॉरेंस का कट्टर दुश्मन माना जाता है।
रिपोर्ट: मोनी देवी
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Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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