काम की बात: दिल्ली में बिल्डर-मकान मालिक के बीच कोलैबोरेशन एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी, ये होंगे फायदा
दिल्ली सरकार रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में एग्रीमेंट के पंजीकरण के लिए एक फीसदी शुल्क लगेगा।इसके बाद 50-100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर मकान नहीं बनेगा और मकान की खरीद में होने होने वाले विवाद में कमी आएगी।

अमित झा, नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली में अब जमीन मालिक और बिल्डर के बीच होने वाले कोलैबोरेशन एग्रीमेंट (करारनामे) को राजस्व विभाग में पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए दिल्ली सरकार संपत्ति पंजीकरण नियमों में संशोधन करने जा रही है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में यह पंजीकरण कराने के लिए संपत्ति के मूल्य का 1 फीसदी शुल्क देना होगा। एग्रीमेंट को कानूनी मान्यता मिलने से दोनों पक्षों के बीच विवाद घटेंगे और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से राहत मिलेगी।
50-100 रुपये के स्टाम्प पेपर से नहीं चलेगा काम
दिल्ली में बिल्डर और जमीन मालिक अक्सर 50 या 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर फ्लोर बंटवारे का समझौता कर लेते हैं। कई मामलों में दो मंजिल बिल्डर को मिलती हैं और दो मालिक के पास रहती हैं, या एक मंजिल के साथ नकद राशि दी जाती है। मकान तैयार होने पर अक्सर दोनों पक्षों में खींचतान शुरू हो जाती है। सरकार का मानना है कि अनिवार्य पंजीकरण से इस तरह के विवादों पर लगाम लगेगी।
बाद में देना होगा अतिरिक्त शुल्क
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यदि एग्रीमेंट को पहले दर्ज नहीं कराया गया, तो भविष्य में फ्लोर बेचते समय अतिरिक्त 1% शुल्क वसूला जाएगा। अब बिक्री के समय जब खरीदार रजिस्ट्री कराने पहुंचेगा, तब पेंडिंग एग्रीमेंट शुल्क चुकाना पड़ेगा।
जीपीए के जरिए खरीद
बिक्री को भी 100% कानूनी मान्यता देने की तैयारी : सरकार जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के जरिए संपत्ति की खरीद-बिक्री को दोबारा आधिकारिक रूप से शुरू करने पर काम कर रही है। इसके लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए करीब 4 फीसदी शुल्क तय किया जा सकता है।
‘बीएंडबी ऐक्ट’ खत्म करने वाला बिल आज हो सकता है पास
दिल्ली में 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' ऐक्ट को खत्म करने वाला बिल आज विधानसभा में पास हो सकता है। दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने विधानसभा के मॉनसून सत्र में मौजूदा 'बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2007' को खत्म करने के लिए एक बिल शुक्रवार को सदन में चर्चा के लिए पेश किया था। यह विधेयक जून में मालवीय नगर में हुई आग की घटना के बाद लाया गया है। इस हादसे में एक प्रतिष्ठान में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे। आरोप है कि यह प्रतिष्ठान आवश्यक अनुमतियों के बिना संचालित किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि बिल के सोमवार को पारित होने की उम्मीद है। मिश्रा ने मालवीय नगर अग्निकांड के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (इनक्रेडिबल इंडिया) बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2007 और इसके 2010 और 2021 के संशोधन अधिनियमों को वापस लेने की घोषणा की थी। वर्ष 2023 तक दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) योजना के तहत 432 संपत्तियों के 2,200 से अधिक कमरों का रजिस्ट्रेशन किया गया था।
भाषा के इनपुट के साथ


