
धमाका होते ही मची चीख-पुकार, सड़क पर पड़ी थीं लाशें; दिल्ली ब्लास्ट में घायल दाऊद ने बताई आंखों देखी
दाऊद ने कहा कि 'धमाके के बाद वहां आसपास आग की लपटें उठी हुई थीं और चीख पुकार की आवाजें सुनाई दे रही थीं। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। इसलिए मैं बाइक को रोड पर छोड़कर डिवाइडर पर बैठ गया।'
दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके में गाजियाबाद के लोनी थानाक्षेत्र की अशोक नगर कॉलोनी में रहने वाले मोहमद दाऊद भी मामूली रूप से घायल हो गए थे। हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद वह देर रात अपने भाई के साथ घर लौट आए। दाऊद के पैर में चोट लगी है। उनके सही सलामत लौटने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। घटना के खौफनाक पलों को याद करते हुए चश्मदीद दाऊद ने बताया कि धमाका होते ही वहां चीख-पुकार मच गई थी और सड़क पर यहां-वहां लाशें और मानव अंग बिखरे पड़े थे।

मोहम्मद दाऊद ने बताया कि वह लोनी दो नंबर स्थित एक फैक्टरी में नौकरी करते हैं। सोमवार शाम करीब छह बजे वह फैक्टरी से दिल्ली स्थित मीना बाजार में एक दुकान पर प्लास्टिक मोल्डिंग की मशीन लेने के लिए बाइक से जा रहे थे। वह लाल किले के सामने पहुंचे तो ट्रैफिक सिग्नल के पास अचानक उनके पीछे जोरदार धमाका हुआ। धमाके की तेज आवाज और कंपन के चलते वह बाइक समेत सड़क पर गिर गए और पैर में चोट लग गई।
इसके बाद का दृश्य बताते हुए दाऊद ने कहा कि धमाके के बाद वहां आसपास आग की लपटें उठी हुई थीं और चीख पुकार की आवाजें सुनाई दे रही थीं। उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है। इसलिए वह बाइक को रोड पर छोड़कर डिवाइडर पर बैठ गए।
कुछ समय बाद होश संभाला तो देखा कि रोड पर लोगों के शव पड़े हुए थे। लोग घायलों को उठाकर अस्पताल ले जा रहे थे। इस दौरान वहां पहुंची पुलिस ने लोगों की सहायता से उन्हें भी अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने मामले की सूचना अपने छोटे भाई सूफियान को दी, जो कि उस वक्त घर पर था। सूफियान घर पर परिजनों को भाई के साथ हुए हादसे की जानकारी देकर अस्पताल पहुंचा। उन्होंने बताया कि धमाके के दौरान बाइक से गिरने की वजह से उनके पैर में चोट आई थी, हालांकि चिकित्सकों ने इलाज के बाद उन्हें भाई के साथ घर भेज दिया। वह देर रात 11 बजे के बाद घर पर पहुंच गए।
18 सालों से गाजियाबाद में रह रहा परिवार
दाऊद ने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से यूपी के बिजनौर के मोह्मदाबाद गांव का रहने वाला है और करीब 18 सालों से अशोक विहार कॉलोनी में रह रहा है। दाऊद ने बताया कि मां सलमा बीमार रहती हैं। घर पर पत्नी चांदनी, बेटी जिगरा, भाई सुफियान और बहन अमरीन भी है। चांदनी ने बताया कि हादसा होने के बाद से डर का माहौल था। पति के लौटने के बाद राहत की सांस मिली।



