दिल्ली की 92 कॉलोनियों और दर्जनों गांवों में रहने वाले लोगों को राहत, सरकार सुधारने जा रही एक 'गलती'

पीटीआई, नई दिल्ली
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यमुना नदी के पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील बाढ़ क्षेत्र और नदी तल को 'ओ-जोन' कहा जाता है, ऐसे में यहां किसी भी प्रकार के निर्माण पर पूरी तरह रोक है। ऐसे में इस जोन में आने वाले रहवासियों के सामने एक बड़ा संकट पैदा हो गया था।

दिल्ली की 92 कॉलोनियों और दर्जनों गांवों में रहने वाले लोगों को राहत, सरकार सुधारने जा रही एक 'गलती'

दिल्ली के यमुना नदी क्षेत्र की 92 अनधिकृत कॉलोनियों और दर्जनों गांवों में रहने वाले लाखों निवासियों को राज्य सरकार ने एक बड़ी राहत दी है और उनके घरों को ओ-जोन यानी यमुना नदी के किनारे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी और बताया कि इन कॉलोनियों व गांवों को गलती से ओ-जोन में डाल दिया गया था, और अब उस गलती को सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा को लेकर मंगलवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बैठक की, जिसमें बिधूड़ी, तिवारी और प्रवीण खंडेलवाल समेत दिल्ली के कई सांसद शामिल हुए। तिवारी ने बताया कि गुप्ता ने अधिकारियों को इस गलती को सुधारने के निर्देश दिए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया कि इन सभी कॉलोनियों को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ओ-जोन के दायरे में डाल दिया था।

ओ-जोन में प्रतिबंधित रहता है निर्माण कार्य

प्राप्त जानकारी के अनुसार ओ-जोन इलाके में पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील यमुना नदी का तल और बाढ़ का मैदान (फ्लडप्लेन) आता है, और इसी वजह से इस जोन में निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित है। ऐसे में इन 92 इलाकों को इस जोन में शामिल कर लेने से यहां रहने वाले लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया था और उन पर बेदखल किए जाने का खतरा भी मंडराने लगा था। जिसके बाद उन्होंने इस बात का कड़ा विरोध किया था।

सांसद का आश्वसन- किसी भी बस्ती को नहीं छेड़ा जाएगा

आज हुई बैठक के बाद दक्षिण दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने प्रभावित लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ओ-जोन में गलती से शामिल की गई इन कॉलोनियों और गांवों में किसी भी पुरानी बस्ती को नहीं छेड़ा जाएगा, हालांकि वहां किसी भी नए निर्माण की अनुमति नहीं होगी। बिधूड़ी ने बताया कि इन कॉलोनियों को साल 2008 में नियमित (रेगुलराइज) किया गया था और इसके लिए एक नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था। इसके बाद अगस्त 2010 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 92 अनधिकृत कॉलोनियों और लगभग एक दर्जन पुराने गांवों को ओ-जोन के दायरे में डाल दिया था।

शहरी विकास मंत्रालय से मिली मंजूरी

सांसद ने आगे कहा कि सितंबर 2013 में हुई एक बैठक में, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने इन कॉलोनियों को O-जोन से हटाकर F-जोन में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पारित किया था। बिधूड़ी ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय ने इसे मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि, एक NGO के दखल के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बाद में इस कदम पर रोक लगा दी थी, और तब से यह मुद्दा अनसुलझा ही पड़ा है।

Sourabh Jain

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Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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