सोनम वांगचुक जैसे लोग..., CJP के आंदोलन पर क्या बोले मनोज तिवारी, केजरीवाल को मथुरा वाली चुनौती

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने सोनम वांगचुक सहित सीजेपी के आंदोलन को समर्थन दे रहे लोगों को आम आदमी पार्टी का एक्सटेंशन बताया है।  पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 19 दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

sonam wangchuk

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने अरविंद केजरीवाल द्वारा सोनम वांगचुक को समर्थन दिए जाने पर कहा कि सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे बाकी सभी लोग आम आदमी पार्टी का ही विस्तार हैं। जब हर तरफ से जनता ने इन्हें हरा दिया तब ये कभी कॉकरोच पार्टी तो कभी सोनम वांगचुक, इन सभी को मिलाकर देश की गति को कम करने का प्रयास करते हैं। देश की जनता इनको पहचान चुकी है और सही समय पर इनको फिर जवाब देगी।

ये लोग चुनावी हिंदू हैं

बीजेपी सांसद ने आप के राष्ट्रीय संयोजक पर हमला बोलते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल मूलतः हिंदू धर्म के, सनातन धर्म के और देवी-देवताओं के परम विरोधी हैं। इसी दिल्ली में केजरीवाल ने मौलवी लोगों को महीना देने का नियम बनाया था, लेकिन पुजारियों को नहीं। ये लोग चुनावी हिंदू हैं। तिवारी ने कहा कि मैं आज केजरीवाल से बोलना चाहता हूं कि अगर आप सच में सुंदरकांड के समर्थक हो तो एक बार भगवान कृष्ण के जन्मभूमि मथुरा को मुक्त कराकर भव्य मंदिर बनाने का आह्वान कर दें।

वांगचुक का शुभचिंतकों को जवाब

इस बीच सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने की अपील करने वाले राजनेताओं और शुभचिंतकों को जवाब देते हुए कहा कि अगर वह बिना किसी ठोस नतीजे के अनशन तोड़ देंगे तो सरकार को यही संदेश जाएगा कि उसे जनता के प्रति जवाबदेह होने की जरूरत नहीं है। बुधवार रात को जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि मेरी हालत ऐसी भी नहीं है की मैं 2-4 दिन में मर जाऊं। बहुत सारे मेडिकल टेस्ट होते रहे हैं। रिजल्ट काफी नॉर्मल है। हालांकि अनशन शुरू होने के बाद से उनका वजन लगभग 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है।

संसद मार्च में शामिल होने की अपील

वांगचुक ने देशभर के छात्रों, युवाओं, शिक्षकों और आम नागरिकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि लोकतंत्र को समझने का जीवंत अवसर होगा. उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से भी अपील की कि वे इस दिन को 'एक्सपीरिएंशियल एजुकेशन डे' के रूप में मनाएं, ताकि छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें। इससे पहले बुधवार को दिनभर जंतर-मंतर पर कई विपक्षी सांसद और नेता वांगचुक से मिलने पहुंचे। आज अरविंद केजरीवाल भी उनसे मिलने जंतर-मंतर पहुंचने वाले हैं।

आज हाई कोर्ट में सुनवाई

उधर, सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट आज सुनवाई करेगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिका की प्रति एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के वकील को उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने अपने याचिका में सरकार से वांगचुक से बातचीत करने और उनके भूख हड़ताल को खत्म कराने की मांग की है।

Subodh Kumar Mishra

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Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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