छज्जे की ग्रिल में करंट उतरने से बिहार के युवक की मौत, 2 साल पहले हुई थी शादी; गाजियाबाद में दर्दनाक हादसा
गाजियाबाद में दर्दनाक घटना सामने आई है। छज्जे की ग्रिल में करंट उतरने से बिहार के युवक की मौत हो गई। वह अपने परिवार के साथ किराये के मकान में रहता था। बताया जा रहा है कि 2 साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। चार बहनों के बीच वह इकलौता भाई था। उसकी मौत से परिवार गहरे सदमे में है।

गाजियाबाद में दर्दनाक घटना सामने आई है। छज्जे की ग्रिल में करंट उतरने से बिहार के युवक की मौत हो गई। वह अपने परिवार के साथ किराये के मकान में रहता था। बताया जा रहा है कि 2 साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। चार बहनों के बीच वह इकलौता भाई था। उसकी मौत से परिवार गहरे सदमे में है।
गाजियाबाद के सिहानी गेट थानाक्षेत्र में मंगलवार सुबह छज्जे की ग्रिल में उतरे करंट की चपेट में आने से युवक ग्रिल से ही लटक गया। किसी तरह नीचे उतारकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। युवक चार बहनों का इकलौता भाई और परिवार का एकमात्र कमाने वाला था।
मूलरूप से बिहार निवासी 25 साल के चंदन कुमार जयप्रकाश नगर की गली नंबर-आठ स्थित राकेश के मकान में परिवार के साथ किराए पर रहते थे। परिवार में बुजुर्ग माता-पिता, चार बहनें और पत्नी हैं। चंदन पत्थर लगाने का काम करते थे और उन्हीं की आय से पूरे परिवार का भरण-पोषण होता था।
बताया जा रहा है कि उनकी दो वर्ष पूर्व ही शादी हुई थी और वह परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मंगलवार सुबह करीब आठ बजे चंदन रोज की तरह सोकर उठने के बाद छज्जे पर गए थे। जैसे ही उन्होंने लोहे की ग्रिल को पकड़ा तो उसमें प्रवाहित करंट की चपेट में आ गए।
करंट इतना तेज था कि वह खुद को छुड़ा नहीं सके और ग्रिल से ही लटक गए। परिजनों की नजर पड़ते ही घर में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे और बिजली का कनेक्शन बंद कराने के बाद काफी मशक्कत से ग्रिल से अलग किया गया। गंभीर हालत में चंदन को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद ने बताया कि अस्पताल से घटना की जानकारी हुई। सिहानी गेट पुलिस ने जांच की है। अभी तक परिजनों की ओर से कोई शिकायत नहीं दी गई है।
मकान मालिक पर लापरवाही का आरोप
परिजनों और अन्य किरायेदारों ने मकान मालिक पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छज्जे की ग्रिल में पहले भी कई बार करंट आने की शिकायत की गई थी, इसके बावजूद मकान मालिक ने समस्या को नजरअंदाज किया और कोई मरम्मत नहीं कराई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते विद्युत समस्या को ठीक करा दिया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


