DU प्रोफेसर हत्याकांड : 1400 KM का सफर कर पहुंचे दिल्ली, नाबालिग बेटे को भी लाए थे साथ; किराएदार कपल ने ऐसे रची साजिश
दिल्ली पुलिस ने डीयू की महिला प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल के ब्लाइंड मर्डर केस में बंगाल से एक दंपती और उनके नाबालिग बेटे को पकड़कर केस सॉल्व लिया है। आरोपी कपल डीयू प्रोफेसर के बंगाल स्थित घर में किराएदार थे।

पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर थाना क्षेत्र स्थित सत्यम अपार्टमेंट में दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस वारदात को अंजाम देने वाले कोई और नहीं, बल्कि महिला प्रोफेसर के ही करीबी रिश्तेदार निकले। पूर्वी जिला पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बर्धमान से एक दंपती और उनके नाबालिग बेटे को पकड़ा है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह पूरी खौफनाक साजिश पैतृक संपत्ति के विवाद को लेकर रची गई थी। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।
डीसीपी राजीव कुमार के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 42 वर्षीय रामप्रसाद दास, उसकी पत्नी 36 वर्षीय बनश्री दास और 13 वर्षीय नाबालिग बेटे के रूप में हुई है। ये लोग पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में कलना रोड के पास रहने वाले हैं। आरोपी रामप्रसाद दास बर्धमान में सेनेटरी की दुकान चलाता है। वारदात के दौरान पुलिस के शक से बचने के लिए आरोपी अपने नाबालिग बेटे को भी साथ में लाए थे। जांच में पता चला कि आरोपी परिवार महिला प्रोफेसर के चाचा के माध्यम से उनके संपर्क में आया था। यह परिवार 2023 से बर्धमान, पश्चिम बंगाल स्थित देवोस्मिता पॉल के पुस्तैनी मकान में किराये पर रह रहा था। यह मकान पारिवारिक समझौते के तहत देवोस्मिता के हिस्से में आया था। देवोस्मिता लगातार आरोपियों से वह मकान खाली करने को कह रही थीं। हाल ही में उनकी तरफ से अंतिम चेतावनी दिए जाने के बाद आरोपियों ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए हत्या की साजिश रची और पूरी तैयारी के साथ करीब 1400 किलोमीटर का सफर तय कर 3 जून को दिल्ली पहुंचे थे।
फर्जी पहचान पत्र देकर होटल में रुके
आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया। दिल्ली पहुंचने के बाद वे चिल्ला गांव, दल्लूपुरा के एक गेस्ट हाउस में ठहरे। यहां पहचान छिपाने के लिए उन्होंने नवादा, बिहार निवासी सतीश और बर्धमान, पश्चिम बंगाल निवासी सोमा चौधरी के नाम के आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। जांच के दौरान पुलिस ने जब इन आधार कार्डों से जुड़े नंबरों की जानकारी खंगाली, तो पता चला कि आरोपियों ने विशेष रूप से वारदात को अंजाम देने के लिए अंजान लोगों के आधार कार्ड को अवैध रूप से हासिल किया था।
रेलवे स्टेशन से मिले फुटेज के जरिये आरोपियों तक पहुंची पुलिस
देवोस्मिता की बहन द्वारा की गई पीसीआर कॉल के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में खुलासा हुआ कि घटना वाले दिन सोसाइटी में 180 लोग आए थे, जिनमें से 176 लोगों को पुलिस ने जांच के बाद क्लीनचिट दे दी। पुलिस की सात विशेष टीमों ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की मदद से चार संदिग्धों की पहचान की। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और गेस्ट हाउस के रिकॉर्ड के आधार पर 6 जून को दिल्ली पुलिस की टीम बर्धमान पहुंची। रेलवे स्टेशन से लेकर आगे तक के सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए पुलिस उनके ठिकाने तक जा पहुंची और 7 जून को तीनों को धर दबोचा।
वारदात के बाद टैक्सी, ऑटो और ट्रेन से भागे
वारदात वाले दिन आरोपी सत्यम अपार्टमेंट पहुंचे। अपार्टमेंट के अंदर सीढ़ियों और लिफ्ट का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपना चेहरा पूरी तरह से छिपा रखा था। जब आरोपी प्रोफेसर के घर पहुंचे तो जानकार होने के चलते इनको घर में आसानी से प्रवेश भी मिल गया। इसके बाद आरोपियों ने पहले प्रोफेसर के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया और उसके बाद उस्तरे से कलाई की नस काट दी। वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने अपने कपड़े बदले और फिर चेहरा ढककर वहां से निकल गए। वारदात के बाद आरोपी घटनास्थल से टैक्सी और फिर ऑटो से आनंद विहार होते हुए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे और पूर्वा एक्सप्रेस से बर्धमान फरार हो गए।
आरोपियों के कब्जे से लूटा गया फोन बरामद हुआ
पुलिस ने आरोपियों के पास से प्रोफेसर देबोस्मिता रॉय का लूटा गया मोबाइल फोन, हत्या में इस्तेमाल किया गया उस्तरा, वारदात के वक्त पहने गए कपड़े और टोपी, एक बैग, आरोपियों के आने-जाने की ट्रेन टिकटें और यात्रा के दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल पकड़े गए सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है और मामले की आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी जांच करेगी की इस साजिश में कोई और तो शामिल नहीं था।


