
गुरुग्राम में मकान का नक्शा पास कराने से पहले जमा करनी होगी मलबा निस्तारण फीस
गुरुग्राम नगर निगम ने शहर में खुले में मलबा फेंकने की समस्या पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब भवन का नक्शा पास कराने से पहले ही मकान मालिक को मलबा निस्तारण फीस जमा करनी होगी। निगम ने योजना का प्रस्ताव निगमायुक्त के पास मंजूरी के लिए भेजा है।
गुरुग्राम नगर निगम (एमसीजी) ने शहर में खुले में मलबा फेंकने की समस्या पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब भवन का नक्शा पास कराने से पहले ही मकान मालिक को मलबा निस्तारण शुल्क जमा करना होगा। यह योजना एमसीजी के योजनाकार विंग ने तैयार की है और इसे निगम आयुक्त के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
2017 के बाद से मलबा शुल्क नहीं लिया जा रहा था, जिससे शहर में अवैध डंपिंग बढ़ गई थी। नई योजना के तहत शुल्क प्रति वर्ग गज के हिसाब से लिया जाएगा। इसके साथ ही मकान मालिक को निर्माण या विध्वंस से निकला मलबा निगम की एजेंसी को सौंपना होगा। एजेंसी 720 रुपये प्रति टन की दर से मलबा बसई प्लांट तक पहुंचाकर उसका निस्तारण करेगी। नक्शा पास करवाते समय 20 से 25 हजार रुपये सुरक्षा राशि के रूप में लिए जाएंगे, जो मलबा प्लांट में रसीद जमा करने के बाद लौटा दी जाएगी।
योजना से लोगों को यह लाभ होगा
इस योजना से लोगों को मलबा फेंकने के लिए एक कानूनी और व्यवस्थित रास्ता मिलेगा। उन्हें अवैध तरीके से मलबा डंप करने या निजी ठेकेदारों पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं होगी। खुले में मलबा फेंकने पर निगम भारी जुर्माना लगाता है। इस योजना को अपनाने से लोग ऐसे जुर्माने से बच सकेंगे। यह पहल शहर को स्वच्छ रखने में मदद करेगी।
यह होगा नुकसान
यह योजना मकान मालिकों के लिए निर्माण की लागत को बढ़ा देगी, क्योंकि अब उन्हें नक्शा पास कराने के समय ही एक अतिरिक्त शुल्क देना होगा। अगर मलबा उठाने में देरी होती है या प्रक्रिया में लालफीताशाही आती है, तो लोगों को परेशानी हो सकती है।यह भी संभव है कि कुछ लोग इस शुल्क से बचने के लिए अभी भी अवैध तरीके से मलबा फेंकने की कोशिश करें, जिससे निगम के लिए निगरानी की चुनौती बनी रहेगी।
प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम, ''निगम का लक्ष्य शहर को पूरी तरह मलबामुक्त करना है। इस योजना को जल्द लागू किया जाएगा, ताकि अवैध डंपिंग पर रोक लग सके।''





